Nursing Outsourcing: नर्सों की आउटसोर्सिंग पर भड़का फेडरेशन, कहा- मरीजों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़

Nursing Outsourcing: नर्सों की आउटसोर्सिंग पर भड़का फेडरेशन, कहा- मरीजों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़
नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल में 145 नर्सिंग अधिकारियों की आउटसोर्सिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय सरकारी नर्स फेडरेशन (AIGNF) ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय को चेतावनी दी है कि यदि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया तो देशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सामूहिक सीएल और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
फेडरेशन का कहना है कि केंद्र सरकार के अस्पतालों में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती केवल नियमित आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए एनओआरसीईटी (Nursing Officer Recruitment Common Eligibility Test) प्रक्रिया का ही पालन किया जाए। संगठन ने आउटसोर्सिंग के बजाय ‘नर्सिंग रेजिडेंट’ मॉडल लागू करने की मांग उठाई है। इसके तहत मेरिट के आधार पर छह महीने के निश्चित कार्यकाल के लिए नर्सों की नियुक्ति की जा सकती है।
फेडरेशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि आउटसोर्सिंग के जरिए की जाने वाली नियुक्तियां मरीजों की सुरक्षा और नर्सिंग सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। संगठन का कहना है कि एजेंसी आधारित अस्थायी भर्ती व्यवस्था में जवाबदेही कम हो जाती है, जिससे अस्पतालों की सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था भ्रष्टाचार, कर्मचारियों के शोषण और ब्लैक मनी को बढ़ावा देती है। फेडरेशन के अनुसार, निजी एजेंसियों के माध्यम से भर्ती होने पर कर्मचारियों को उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पातीं, जबकि मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रभावित होती हैं।
AIGNF ने वर्ष 2016 में जारी उस सरकारी आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें नर्सिंग सेवाओं में आउटसोर्सिंग रोकने की नीति लागू की गई थी। संगठन का कहना है कि सरकार को अपने पुराने आदेश का पालन करते हुए स्थायी भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर के सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ आंदोलन तेज करेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।





