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Samajwadi Party: सपा को बड़ा झटका, दो वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ी

Samajwadi Party: सपा को बड़ा झटका, दो वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ी

समाजवादी पार्टी को गौतमबुद्धनगर में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष मनोज भाटी (बोडाकी) एडवोकेट और सचिव शोभाराम चंदीला एडवोकेट ने समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। दोनों नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rajkumar Bhati के हालिया बयानों पर कड़ी नाराजगी जताई है।

नोएडा के स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पार्टी के कुछ नेताओं और प्रवक्ताओं द्वारा दिए जा रहे बयान समाज में विभाजनकारी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे अधिवक्ता समाज और विभिन्न समुदायों के बीच असहज स्थिति पैदा हो रही है।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज भाटी ने कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि जिला बार एसोसिएशन में अलग-अलग धर्मों और समाजों के लोग एकजुट होकर काम करते हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार की विवादित या अपमानजनक टिप्पणी समाज में गलत संदेश देती है। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों के नेताओं को अपने सार्वजनिक बयानों में संयम और सामाजिक सौहार्द का ध्यान रखना चाहिए।

मनोज भाटी समाजवादी पार्टी की अधिवक्ता सभा में राष्ट्रीय सचिव के पद पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वहीं शोभाराम चंदीला भी लंबे समय से पार्टी से जुड़े सक्रिय और पुराने कार्यकर्ता माने जाते रहे हैं। दोनों नेताओं का पार्टी छोड़ना स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

प्रेस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं और प्रवक्ताओं के बयान लगातार समाज में नकारात्मक माहौल पैदा कर रहे हैं। उनका कहना था कि वे लंबे समय से पार्टी की विचारधारा और संगठन के साथ जुड़े रहे, लेकिन हालिया घटनाक्रम से वे खुद को असहज महसूस कर रहे थे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच इस तरह के इस्तीफे समाजवादी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और गौतमबुद्धनगर क्षेत्र में अधिवक्ता और गुर्जर समाज के बीच इसका असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है।

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