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Uttar Pradesh : बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशु के जन्मजात दांतों का सफल उपचार

Bulandshahar News (अवनीश त्यागी) : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध जिला अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग ने एक माह के नवजात शिशु के जन्मजात दांतों यानी ‘नियो नेटल टीथ’ का सफल उपचार कर एक जटिल समस्या का समाधान किया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक डेंटल साइंस तकनीकों का उपयोग करते हुए शिशु को गंभीर परेशानी से राहत दिलाई।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर बच्चों के दांत छह माह की आयु के बाद निकलते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में जन्म के समय या जन्म के एक माह के भीतर ही दांत दिखाई देने लगते हैं। इस स्थिति को ‘नियो नेटल टीथ’ कहा जाता है।

मामले में एक माह के नवजात शिशु के निचले जबड़े में दो दांत समय से पहले विकसित हो गए थे। इन पैने दांतों के कारण शिशु की जीभ पर घाव बन गए थे, जिसे डेंटल साइंस में ‘रीगा-फेड रोग’ कहा जाता है। घावों के चलते शिशु को दुग्धपान करने में अत्यधिक दर्द और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था।

दंत विभाग की सहायक आचार्य एवं पेडोडोंटिस्ट विशेषज्ञ डॉ. अलका रानी ने बताया कि ऐसे दांतों की जड़ें पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिसके कारण उनके टूटकर श्वास नली या फेफड़ों में फंसने का खतरा बना रहता है। इसी वजह से चिकित्सकीय परामर्श के बाद इन दांतों को निकालना आवश्यक समझा गया।

डॉ. अलका रानी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस समस्या को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। कई लोग इसे माता-पिता या शिशु के श्रापित होने से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह समस्या जेनेटिक या विकास संबंधी कारणों से हो सकती है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तनाव भी इसका एक कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ताकि समय रहते जटिलताओं से बचा जा सके।

कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज का दंत चिकित्सा विभाग अब आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ पेडोडोंटिक एवं एंडोडोंटिक डॉक्टरों की मदद से मुख एवं दंत रोगों के जटिल मामलों का सफल उपचार करने में सक्षम हो चुका है, जो बुलंदशहर जनपद के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।

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