Inclusive Horizon Summit 2026: देहरादून में समावेशी सशक्तिकरण की मिसाल, डॉ. त्रिभुवन सिंह को नेशनल आइकॉन ऑफ रिहैबिलिटेशन सम्मान
रिपोर्ट: अजीत कुमार
नोएडा स्थित फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन द्वारा देहरादून के एसबीएन एकेडमी इंटर कॉलेज में आयोजित ‘इंक्लूसिव होराइजन देहरादून समिट 2026’ ने जागरूकता, समावेशिता और सशक्तिकरण का एक सशक्त संदेश दिया। इस भव्य आयोजन में पुनर्वास क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन सिंह को उनके 27 वर्षों के निरंतर सेवा कार्य के लिए ‘नेशनल आइकॉन ऑफ रिहैबिलिटेशन’ सम्मान से सम्मानित किया गया। जैसे ही इस सम्मान की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और यह क्षण उपस्थित सभी लोगों के लिए गर्व का विषय बन गया।
यह समिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘स्वदेशी भारत’ पहल के अंतर्गत फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन, नोएडा और विन्सम स्टेप्स, देहरादून के संयुक्त प्रयास से आयोजित की गई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और युवाओं के लिए अवसर, प्रशिक्षण और सम्मान का मंच प्रदान करना था, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
समिट के पहले भाग में ‘शोकेस गैलरी’ का आयोजन किया गया, जहां विशेष आवश्यकता वाले युवाओं द्वारा व्यावसायिक प्रशिक्षण के तहत तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इन उत्पादों में हैंड वॉश, साबुन, चॉकलेट, दीये और सजावटी सामान शामिल थे। खास बात यह रही कि इन उत्पादों को प्रतिभागियों ने स्वयं प्रदर्शित किया और बेचा भी, जिससे ‘कौशल से आत्मनिर्भरता’ की भावना को वास्तविक रूप मिला।
दूसरे सत्र में ‘पैरेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम’ आयोजित किया गया, जिसमें दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को घर पर देखभाल, दैनिक गतिविधियों और थेरेपी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। पुनर्वास क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अभिभावकों के सवालों का समाधान करते हुए उन्हें घर पर निरंतर अभ्यास के लिए मार्गदर्शन दिया, जिससे बच्चों के विकास में निरंतरता बनी रह सके।
समिट का तीसरा और सबसे भावुक हिस्सा ‘एक सम्मान माँ के नाम’ रहा, जिसमें दिव्यांग बच्चों की माताओं को उनके समर्पण, त्याग और अथक परिश्रम के लिए मंच पर सम्मानित किया गया। यह सत्र पूरे आयोजन का भावनात्मक केंद्र बन गया, जहां कई माताओं की संघर्ष भरी कहानियों ने सभी को भावुक कर दिया। यह सम्मान उन माँओं को समर्पित था जो हर दिन अपने बच्चों की ताकत बनकर उनके जीवन को बेहतर बनाने में जुटी रहती हैं।
इस समिट में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई पुनर्वास प्रोफेशनल्स, स्पेशल एजुकेटर्स और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
‘इंक्लूसिव होराइजन समिट 2026’ ने यह साबित कर दिया कि जब जागरूकता, समावेशिता और सशक्तिकरण एक साथ मिलते हैं, तो समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन संभव है।
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