Heatwave Alert India: ‘हीट-रेडी स्कूल’ मॉडल से बच्चों को राहत, सरकार और विशेषज्ञों की खास सलाह

Heatwave Alert India: ‘हीट-रेडी स्कूल’ मॉडल से बच्चों को राहत, सरकार और विशेषज्ञों की खास सलाह
देशभर में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्कूलों के लिए ‘हीट-रेडी’ मॉडल अपनाने की एडवाइजरी जारी की है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में स्कूल प्रशासन और अभिभावकों दोनों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार लू का असर लंबे समय तक रह सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासतौर पर बच्चों पर गर्मी का प्रभाव तेजी से पड़ता है, इसलिए उनके लिए विशेष सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों को ठंडा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना होगा, पानी के कूलरों की नियमित सफाई सुनिश्चित करनी होगी और पर्याप्त जल भंडारण रखना होगा। इसके अलावा कक्षाओं में पंखे और कूलर सही स्थिति में होने चाहिए। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहरी गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की सलाह दी गई है। बच्चों को समय-समय पर पानी पीने, धूप से बचने और किसी भी असहज स्थिति में तुरंत शिक्षक को जानकारी देने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनकी शरीर की सहनशीलता कम होती है और त्वचा भी अधिक संवेदनशील होती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अभिभावक बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाते रहें, भले ही उन्हें प्यास न लगे। छोटे बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी है, जबकि बड़े बच्चों को पानी, नारियल पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए।
बच्चों को हल्के और सूती कपड़े पहनाने, बाहर निकलते समय टोपी या छाता इस्तेमाल करने और तेज धूप में जाने से बचाने की सलाह भी दी गई है। यदि बच्चे में चक्कर, उल्टी, तेज सांस या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। साथ ही बच्चों को कभी भी बंद गाड़ी या बिना वेंटिलेशन वाले कमरे में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
समय रहते सतर्कता और सही तैयारी से हीटवेव के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ‘हीट-रेडी स्कूल’ मॉडल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है।





