AIIMS Delhi Parkinson Treatment: एमआर-गाइडेड HIFU तकनीक से बिना सर्जरी मिलेगा इलाज, मरीजों को बड़ी राहत की तैयारी

AIIMS Delhi Parkinson Treatment: एमआर-गाइडेड HIFU तकनीक से बिना सर्जरी मिलेगा इलाज, मरीजों को बड़ी राहत की तैयारी
नई दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS Delhi) के न्यूरो साइंसेज सेंटर ने पार्किंसन रोग के इलाज के लिए एक नई और अत्याधुनिक तकनीक शुरू करने की तैयारी की है, जिससे मरीजों को बिना सर्जरी के इलाज का विकल्प मिल सकेगा। यह कदम उन मरीजों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो महंगी और जटिल सर्जरी से गुजरते हैं।
विश्व पार्किंसन रोग दिवस के अवसर पर सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर Shailesh B. Gaikwad ने जानकारी दी कि एमआर-गाइडेड HIFU (मैग्नेटिक रेजोनेंस-गाइडेड हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड) तकनीक पार्किंसन के इलाज में एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है। इसे जल्द ही एम्स दिल्ली में कम लागत पर उपलब्ध कराने की योजना है।
वर्तमान में पार्किंसन रोग के मरीजों का इलाज मुख्य रूप से दवाओं और डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) सर्जरी के जरिए किया जाता है। इस सर्जरी में मरीज की खोपड़ी में ड्रिल कर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं और उन्हें शरीर में लगाए गए उपकरण से जोड़ा जाता है, जो काफी जटिल और महंगा इलाज माना जाता है।
इसके मुकाबले नई एमआर-गाइडेड HIFU तकनीक पूरी तरह बिना चीरे और बिना सर्जरी के की जाती है। इसमें मरीज को बेहोश भी नहीं किया जाता और वह प्रक्रिया के दौरान होश में रहता है, जिससे रिकवरी भी तेजी से होती है।
इस तकनीक में एमआरआई स्कैन के जरिए दिमाग के उस हिस्से की पहचान की जाती है जो गलत संकेत भेजकर कंपकंपी (tremors) पैदा करता है। इसके बाद शरीर के बाहर से हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासाउंड तरंगों को उसी हिस्से पर केंद्रित किया जाता है, जिससे वहां मौजूद असामान्य गतिविधि निष्क्रिय हो जाती है और कंपकंपी में तुरंत राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पार्किंसन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई बार यह आंकड़े पश्चिमी देशों के बराबर या उससे अधिक भी पाए जा रहे हैं। इस बीमारी में हाथ-पैर कांपना, चलने में कठिनाई और संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान, नियमित दवा, व्यायाम और परिवार के सहयोग से मरीज बेहतर जीवन जी सकते हैं। नई तकनीक के आने से भविष्य में पार्किंसन का इलाज और भी आसान, सुरक्षित और किफायती होने की उम्मीद है।





