Obesity Crisis India: मोटापा केवल आदत नहीं, जटिल बीमारी; ICMR पैनल में उठी बहु-स्तरीय कार्रवाई की मांग

Obesity Crisis India: मोटापा केवल आदत नहीं, जटिल बीमारी; ICMR पैनल में उठी बहु-स्तरीय कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ता मोटापा अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसे विशेषज्ञ ‘डबल बर्डन’ का हिस्सा मान रहे हैं, जहां कुपोषण और मोटापा एक साथ मौजूद हैं। Indian Council of Medical Research के एक अहम पैनल चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि मोटापा केवल व्यक्तिगत आदतों का परिणाम नहीं, बल्कि कई सामाजिक, आर्थिक और जीवनशैली से जुड़े कारकों का संयुक्त प्रभाव है।
आईसीएमआर के वर्णनात्मक अनुसंधान प्रभाग द्वारा आयोजित इस चर्चा में विशेषज्ञों ने मोटापे को नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी और कहा कि समय रहते रोकथाम, व्यापक जागरूकता और सभी के लिए समान स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच ही इस बढ़ते खतरे से निपटने का प्रभावी तरीका है।
इस दौरान Rajiv Bahl सहित कई प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. कामिनी वालिया, डॉ. शिंजिनी भटनागर, डॉ. अनूप मिश्रा, डॉ. वंदना जैन, डॉ. नवल विक्रम और डॉ. पियूष रंजन शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मोटापे को केवल खान-पान या व्यक्तिगत अनुशासन की कमी से जोड़ना गलत है।
चर्चा में यह भी सामने आया कि शहरीकरण, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, बढ़ता स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे मोटापे के प्रमुख कारण हैं। खासकर बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता जताई गई और शुरुआती स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई गई।
पैनल में World Obesity Day की थीम ‘मोटापे पर कार्रवाई करने के 8 अरब कारण’ पर भी चर्चा हुई, जो इस समस्या के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि मोटापा अब केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामुदायिक और राष्ट्रीय स्तर की चुनौती बन चुका है।
नीति स्तर पर बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने स्कूलों और कार्यस्थलों में स्वस्थ वातावरण बनाने, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सस्ती व सुलभ उपचार सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सरकार, समाज और व्यक्तिगत स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। साथ ही सामाजिक कलंक को कम करने और लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी काम करने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य दिया जा सके।





