
Women in Surgery Webinar: लैंगिक असमानता के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व से दूर रह जाती हैं महिलाएं
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘ब्रेकिंग बैरियर्स: वुमन इन सर्जरी’ विषय पर एक विशेष वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें सर्जरी जैसे पुरुष प्रधान क्षेत्र में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों, लैंगिक असमानता और ‘ग्लास सीलिंग’ जैसी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद नेतृत्व के पदों तक उनकी पहुंच अब भी सीमित है और इसे बदलने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
वेबिनार की मुख्य वक्ता अमेरिका स्थित मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के सर्जरी विभाग की सहायक प्रोफेसर शैलवी गुप्ता ने कहा कि महिला सर्जनों को न केवल भारत में बल्कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी अपनी पहचान बनाने के लिए कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ स्थिति में सुधार जरूर हो रहा है, लेकिन अभी भी महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलने में कई बाधाएं सामने आती हैं।
इस चर्चा में एम्स दिल्ली की सर्जन डॉ. सुषमा सागर, अमेरिका स्थित एरिजोना यूनिवर्सिटी की सर्जन तान्या आनंद, सफदरजंग अस्पताल दिल्ली की सर्जन सुप्रीत कौर और पीजीआईएमईआर कोलकाता की सर्जन शमिता चटर्जी ने भी अपने अनुभव साझा किए। सभी विशेषज्ञों ने माना कि सर्जरी के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन निर्णय लेने वाले और नेतृत्व के पदों तक पहुंचने में उन्हें अभी भी संघर्ष करना पड़ता है।
एम्स दिल्ली की वरिष्ठ सर्जन प्रोफेसर सुषमा सागर ने कहा कि सर्जरी में सफल करियर के लिए परिवार, कार्यस्थल के अनुकूल वातावरण और पुरुष सहकर्मियों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के जीवन में मासिक धर्म, गर्भधारण और स्तनपान जैसी जैविक प्रक्रियाएं स्वाभाविक हैं, इसलिए इन्हें उनके पेशेवर विकास में बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समाज और संस्थानों को इस वास्तविकता को समझते हुए महिलाओं को समान अवसर देने चाहिए।
वेबिनार के दौरान यह भी सामने आया कि कई बार मरीज महिला सर्जन की बजाय पुरुष सर्जन को प्राथमिकता देते हैं। वहीं कई स्वास्थ्य संस्थानों में चयन और पदोन्नति के दौरान पुरुषों को अधिक अवसर मिलने की शिकायतें भी सामने आती हैं। हालांकि एक सर्वेक्षण के अनुसार मरीजों से व्यवहार, संवाद और संवेदनशीलता के मामले में महिला सर्जन अधिक आत्मीय और सहानुभूतिपूर्ण पाई गईं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को अपनी आवाज अधिक मजबूती और स्पष्टता के साथ उठाने की जरूरत है। साथ ही उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सके और प्रतिभा के आधार पर अवसर मिल सकें।
यह वेबिनार रविवार को इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
‘ग्लास सीलिंग’ शब्द का उपयोग उस अदृश्य बाधा को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो किसी व्यक्ति—खासकर महिलाओं—को उनके पास पर्याप्त योग्यता और अनुभव होने के बावजूद संस्थानों में उच्च पदों तक पहुंचने से रोकती है। कई बार महिलाएं डॉक्टर या कर्मचारी के रूप में तो नियुक्त हो जाती हैं, लेकिन डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष या अन्य नेतृत्व पदों तक उनकी पहुंच सीमित रह जाती है। यह बाधा दिखाई नहीं देती, लेकिन संस्थागत संरचनाओं और सामाजिक सोच के कारण मौजूद रहती है।





