
New Delhi : राजधानी में देश का पहला एआई-संचालित समग्र शिक्षा मॉडल शुरू हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरोजिनी नगर स्थित सीएम श्री स्कूल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर 75 सीएम श्री स्कूल परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई। इन स्कूलों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों जैसी आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा उपलब्ध होगी।

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री आशीष सूद, जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। दिल्ली सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक, तकनीकी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन स्कूलों के माध्यम से गरीब, सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा सुधार के जो प्रयास हो रहे हैं, उनमें दिल्ली की यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रेखा गुप्ता ने कहा कि सीएम श्री स्कूल केवल नए भवन नहीं, बल्कि बच्चों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक सशक्त माध्यम हैं। यहां एआई आधारित स्मार्ट क्लासरूम, इंटरैक्टिव पैनल, डिजिटल कंटेंट और आधुनिक लर्निंग टूल्स के जरिए पढ़ाई कराई जाएगी। प्रत्येक छात्र की क्षमता के अनुरूप शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग होगा।
सरकारी स्कूलों से ही अब जेईई, नीट, सीयूईटी, सीएलएटी और एनडीए जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कराई जाएगी। इसके लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें नियमित टेस्ट और प्रदर्शन मूल्यांकन की सुविधा होगी। मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब्स में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और मेकाट्रॉनिक्स जैसे विषयों की शिक्षा दी जाएगी। आईसीटी लैब्स के माध्यम से डिजिटल साक्षरता और कोडिंग कौशल विकसित किए जाएंगे, जबकि डिजिटाइज्ड लाइब्रेरी में ई-बुक्स और शोध सामग्री उपलब्ध रहेगी।
करियर लैब में विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के आधार पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। ‘साइंस ऑफ लिविंग’ स्पेस के जरिए मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। बहुभाषी शिक्षा और विदेशी भाषाओं के लिए लैंग्वेज लैब स्थापित की जा रही हैं। पहली बार सरकारी स्कूलों में उद्योगों के साथ मिलकर अनिवार्य इंटर्नशिप भी शुरू की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि 7,000 कक्षाओं को एआई-सक्षम स्मार्ट क्लासरूम में बदला जा रहा है। 175 नई आईसीटी लैब्स, 100 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी और 175 से ज्यादा लैंग्वेज लैब्स शुरू की जा रही हैं। 31 मार्च से पहले सभी 7,000 स्मार्ट क्लासरूम तैयार हो जाएंगे।
सरकार का दावा है कि यह शिक्षा मॉडल केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों, विदेशी विश्वविद्यालयों और उद्यमिता के अवसरों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस पहल के साथ दिल्ली के सरकारी स्कूलों को अभिभावकों की पहली पसंद बनाने और राजधानी को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।





