Noida Child Suicide: स्कूल नहीं जाने पर डांट से आहत 12 साल के बच्चे ने की आत्महत्या, घर में अकेले होने पर उठाया खौफनाक कदम

Noida Child Suicide: स्कूल नहीं जाने पर डांट से आहत 12 साल के बच्चे ने की आत्महत्या, घर में अकेले होने पर उठाया खौफनाक कदम
नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल न जाने पर माता-पिता की डांट से आहत एक 12 साल के बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना 3 फरवरी की है और थाना फेस-2 क्षेत्र के नगला चरण दास गांव की बताई जा रही है। मासूम की मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है और एक बार फिर बच्चों के मानसिक दबाव और पारिवारिक संवाद पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार मृतक बच्चे की पहचान गोलू के रूप में हुई है, जो कक्षा पांच का छात्र था। गोलू अपने परिवार के साथ नगला चरण दास गांव में रहता था। उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी और उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली थी। परिवार में उसकी एक बड़ी बहन भी है। घटना के दिन घर पर कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। मां और सौतेले पिता दोनों नौकरी पर चले गए थे, जबकि बहन स्कूल गई हुई थी।
जानकारी के मुताबिक गोलू अक्सर स्कूल जाने से बचने के लिए बहाने बनाया करता था। 3 फरवरी को भी उसने स्कूल न जाने की जिद की और घर पर रहकर टीवी देखने की इच्छा जताई। इस पर मां और पिता ने उसे समझाया और डांटा। साथ ही यह भी कहा कि अगर वह स्कूल नहीं जाएगा तो केबल कनेक्शन हटवा दिया जाएगा। डांट के बाद गोलू बिना कुछ कहे अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर चले गए।
जब परिवार के लोग वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि गोलू कमरे में पंखे से फंदा लगाकर लटका हुआ था। यह दृश्य देखकर घर में कोहराम मच गया। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारकर कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है और किसी तरह की साजिश या अन्य कारण सामने नहीं आए हैं। हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों पर पढ़ाई और अनुशासन को लेकर डाला गया दबाव किस हद तक घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की भावनाओं को समझना, उनसे संवाद बनाए रखना और छोटी बातों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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