
ICG fast patrol vessel: आईसीजी के लिए फास्ट पेट्रोल वेसल्स का निर्माण शुरू, एआई और बहुउद्देशीय ड्रोन से होंगे सुसज्जित
नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की समुद्री सुरक्षा और तटीय बचाव क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से फास्ट पेट्रोल वेसल्स (एफपीवी) का निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है। वीरवार को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई के रिची ड्राई डॉक में एफपीवी-3 का कील लेइंग समारोह और एफपीवी-6 का प्लेट कटिंग समारोह संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता तटरक्षक क्षेत्रीय मुख्यालय (पश्चिम) के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल विनोद साखरकर और डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल शशि भूषण ने की। इस अवसर पर आईसीजी और एमडीएल के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बता दें कि आईसीजी के लिए 14 स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल के डिजाइन और निर्माण का अनुबंध 24 जनवरी 2024 को संपन्न हुआ था। इन पोतों का विस्थापन लगभग 340 टन होगा और ये वॉटर-जेट चालित होंगे। इन्हें तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव (SAR) और कानून प्रवर्तन अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
एफपीवी में न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इनमें मैसर्ज त्रिवेणी, मैसूर द्वारा निर्मित स्वदेशी गियरबॉक्स और मैसर्ज एमजेपी इंडिया के वॉटर जेट्स लगाए जाएंगे। इसके अलावा, पोतों को अत्याधुनिक मशीनरी, एआई आधारित प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम और बहुउद्देशीय ड्रोन से सुसज्जित किया जाएगा, जो खोज, निगरानी और आपातकालीन बचाव कार्यों में मदद करेंगे।
आईसीजी अधिकारियों ने बताया कि इन पोतों की तैनाती से तटीय क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा में तेजी आएगी और तटीय अपराध, समुद्री अपहरण और प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव कार्यों की दक्षता बढ़ेगी। एआई आधारित प्रणालियों और ड्रोन के संयोजन से ये पोत वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों की निगरानी कर सकेंगे और त्वरित निर्णय लेने में सक्षम होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी तकनीक और एआई आधारित प्रणालियों से लैस इन फास्ट पेट्रोल वेसल्स से भारत की समुद्री सुरक्षा और खोज-बचाव क्षमता में नई क्रांति आएगी। आईसीजी की यह पहल देश में तटीय सुरक्षा और समुद्री कानून प्रवर्तन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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