
AIIMS: देश के 20 AIIMS संस्थान करेंगे मिलकर स्वास्थ्य अनुसंधान, पैन-इंडिया रिसर्च कंसोर्टियम का एमओयू साइन
नई दिल्ली। स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के तहत एम्स दिल्ली ने देश के सभी 20 एम्स संस्थानों के साथ एक पैन-इंडिया रिसर्च कंसोर्टियम की स्थापना की है। इसके लिए गुरुवार को रामलिंगस्वामी बोर्ड रूम में एम्स निदेशक प्रो एम श्रीनिवास और सभी 20 एम्स संस्थानों के निदेशकों ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह कंसोर्टियम देश में स्वास्थ्य अनुसंधान को एकीकृत करने और वैज्ञानिक विधि के तहत तेजी से परिणाम लाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
एम्स दिल्ली के डीन डॉ. निखिल टंडन ने बताया कि इस कंसोर्टियम के तहत संयुक्त शोध परियोजनाओं, बहु-संस्थागत अध्ययन, क्लिनिकल ट्रायल, शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान और श्रेष्ठ प्रथाओं का साझा किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप जैव-चिकित्सीय और क्लिनिकल रिसर्च को मजबूत करना है। इसमें नई दिल्ली के अलावा भोपाल, जोधपुर, पटना, नागपुर, ऋषिकेश, रायपुर, राजकोट, गुवाहाटी, जम्मू सहित अन्य एम्स संस्थान शामिल हैं।
डॉ. गोविंद मखारिया, एसोसिएट डीन (रिसर्च) और गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने बताया कि इस कंसोर्टियम की स्थापना से सभी 20 एम्स में कार्यरत वैज्ञानिकों को स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करने में मदद मिलेगी। उन्हें संस्थान और व्यक्तिगत स्तर पर पर्याप्त फंडिंग दी जाएगी ताकि वित्तीय बाधाओं के कारण कोई भी जीवन उपयोगी शोध अधूरा न रह सके। प्रमुख शोध क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित हेल्थकेयर, किफायती कैंसर उपचार, अस्पताल संक्रमण, मेटाबॉलिक रोग, जीआई रोग, अस्थि रोग और मधुमेह के नवोन्मेषी उपचार शामिल हैं।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शोध प्राथमिकताओं को निर्धारित करने, मल्टी-सेंट्रिक क्लिनिकल ट्रायल को बढ़ावा देने और बेहतर समन्वय के लिए हर संस्थान में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। एम्स दिल्ली के निदेशक प्रो एम श्रीनिवास ने कहा कि यह कंसोर्टियम उच्च गुणवत्ता वाले, राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक शोध को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पहल एम्स रिसर्च डे 2026 का प्रमुख आकर्षण रही और देश में साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य नीति को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
इस कंसोर्टियम के जरिए अब किसी भी एम्स संस्थान में हो रहे वैज्ञानिक शोध पर सभी 20 एम्स संस्थान सीधे नजर रख सकेंगे, जिससे शोध में पारदर्शिता बढ़ेगी और एक ही विषय पर दोहराए जाने वाले शोध की संभावना समाप्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोगों के उपचार और हेल्थकेयर नवाचार में महत्वपूर्ण तेजी आएगी।
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