NDCT rules amendment: दवा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए NDCT नियमों में बड़े बदलाव, दवा विकास प्रक्रिया होगी तेज

NDCT rules amendment: दवा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए NDCT नियमों में बड़े बदलाव, दवा विकास प्रक्रिया होगी तेज
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में दवा अनुसंधान और विकास को नई गति देने के उद्देश्य से न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स (NDCT) नियम, 2019 में बड़े और अहम संशोधन अधिसूचित किए हैं। इन बदलावों का मकसद नियामक बोझ को कम करना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना और भारत में दवा विकास प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाना है। मंत्रालय के अनुसार ये सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं, ताकि भारत वैश्विक फार्मास्यूटिकल अनुसंधान के क्षेत्र में और मजबूत स्थिति बना सके।
संशोधित नियमों के तहत गैर-व्यावसायिक उद्देश्य से दवाओं के निर्माण के लिए अब टेस्ट लाइसेंस लेना अनिवार्य नहीं होगा। पहले इस प्रक्रिया में लंबा समय लगता था, जिससे दवा अनुसंधान में देरी होती थी। नए नियमों के अनुसार अब कंपनियां केवल ऑनलाइन पूर्व सूचना देकर दवा विकास की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगी। हालांकि, यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी। साइटोटॉक्सिक, नारकोटिक और साइकोट्रॉपिक जैसी उच्च जोखिम वाली दवाओं के लिए पहले की तरह सख्त नियम लागू रहेंगे।
सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से दवा विकास प्रक्रिया में कम से कम 90 दिनों की बचत हो सकेगी, जिससे शोधकर्ताओं और फार्मा कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे नई दवाओं के अनुसंधान और परीक्षण की गति तेज होगी और मरीजों तक नई दवाएं जल्दी पहुंच सकेंगी।
इसके अलावा, जिन श्रेणियों में टेस्ट लाइसेंस की आवश्यकता बनी रहेगी, वहां भी प्रक्रिया को सरल किया गया है। अब टेस्ट लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा को 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। इससे लंबित मामलों में कमी आएगी और कंपनियों को समयबद्ध मंजूरी मिल सकेगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत कम जोखिम वाले बायोएवेलिबिलिटी (BA) और बायोइक्विवेलेंस (BE) अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब इन अध्ययनों की शुरुआत केवल ऑनलाइन सूचना के आधार पर की जा सकेगी। इससे जेनेरिक दवाओं और अन्य कम जोखिम वाली दवाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ये सुधार भारतीय दवा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बनाएंगे। साथ ही, इससे भारत को फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और नवाचार के लिए एक पसंदीदा वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। उद्योग जगत ने भी इन बदलावों को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि इससे निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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