Noida accident: गड्ढे में गिरी कार, पिता के सामने तड़पता रहा बेटा, 80 मिनट बाद पानी में डूबकर मौत

Noida accident: गड्ढे में गिरी कार, पिता के सामने तड़पता रहा बेटा, 80 मिनट बाद पानी में डूबकर मौत
नोएडा। घने कोहरे और कथित लापरवाही ने नोएडा में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली। गुरुग्राम से नोएडा लौट रहे 27 वर्षीय युवराज मेहता की ग्रैंड विटारा कार सेक्टर-150 में एटीएस ले ग्रांड के पास नाले की दीवार तोड़ते हुए एक खाली प्लॉट के बेसमेंट में जा गिरी। यह बेसमेंट करीब 30 फीट गहरा था और उसमें नाले का पानी भरकर करीब 70 फीट तक जलभराव हो चुका था। कार इसी पानी में डूब गई और युवराज की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के बाद युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलने में सफल रहा और कार की छत पर चढ़कर मोबाइल फोन से अपने पिता को पूरी घटना की जानकारी दी। युवराज के पिता ने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी और खुद भी मौके की ओर रवाना हो गए। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और बाद में एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन अंधेरा, घना कोहरा और गहरे पानी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद मुश्किल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवराज करीब 80 मिनट तक मदद के लिए चीखता रहा। वह लगातार कह रहा था कि कार डूब रही है और कोई उसे बचा ले, लेकिन पानी की गहराई, ठंड और लोहे की सरियों के कारण कोई भी अंदर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। धीरे-धीरे पानी बढ़ता गया और आखिरकार युवराज कार समेत बेसमेंट में डूब गया। कुछ देर बाद उसकी आवाजें भी बंद हो गईं। सुबह करीब साढ़े चार बजे रेस्क्यू टीम ने उसका शव बाहर निकाला।
पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन के अनुसार, 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे यह हादसा हुआ। 12 बजकर 20 मिनट पर युवराज ने पिता को फोन किया। 12 बजकर 50 मिनट पर पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचे। रात करीब 1 बजकर 15 मिनट पर एसडीआरएफ और 1 बजकर 55 मिनट पर एनडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन तब तक हालात हाथ से निकल चुके थे।
घटनास्थल पर मौजूद एक डिलीवरी बॉय मुनेंद्र ने बताया कि उसने खुद रस्सी बांधकर पानी में उतरने की कोशिश की, लेकिन अंधेरे और कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया। पुलिस और अन्य लोग भी जोखिम के कारण पानी में नहीं उतर सके।
युवराज मेहता सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। उनके पिता राजकुमार मेहता भारतीय स्टेट बैंक से निदेशक पद से सेवानिवृत्त हैं। युवराज अपनी मां को पहले ही खो चुके थे और परिवार में वह इकलौते बेटे थे। वह गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।
स्थानीय निवासियों ने इस हादसे के लिए नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। लोगों का कहना है कि इस कट पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और बार-बार बेरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद प्राधिकरण ने आनन-फानन में मौके पर सैकड़ों टन मलबा डलवा दिया।
निवासियों और परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते और रेस्क्यू में तेजी दिखाई जाती, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। घने कोहरे, खुले गड्ढे और धीमी राहत कार्रवाई ने एक बेटे को उसके पिता की आंखों के सामने मौत के मुंह में धकेल दिया।
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