Swami Vivekananda Jayanti: बच्चों को कंबल बांटकर मानव सेवा के रूप में मनाई गई स्वामी विवेकानंद जयंती

Swami Vivekananda Jayanti: बच्चों को कंबल बांटकर मानव सेवा के रूप में मनाई गई स्वामी विवेकानंद जयंती
रिपोर्ट: रवि डालमिया
स्वामी विवेकानंद जी के विचार “मैं उसे प्रभु का सेवक मानता हूँ जिसे लोग मानव कहते हैं” को आत्मसात करते हुए राष्ट्रवादी चिकित्सक संघ द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती मानव सेवा के रूप में मनाई गई। यह आयोजन दिल्ली के गोकलपुरी क्षेत्र स्थित महावत बस्ती में संचालित संस्कारशाला के विद्यार्थियों के साथ किया गया, जहां ठंड से बचाव के उद्देश्य से 100 से अधिक बच्चों को कंबल वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के बारे में बताया गया और उनके विचारों में निहित मानवता, सेवा और राष्ट्रभाव को सरल शब्दों में समझाया गया।
चिकित्सकों ने सनातन धर्म में निहित हिंदुत्व की मानवतावादी परिभाषा को बच्चों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि समाज सेवा ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। राष्ट्रवादी चिकित्सक संघ की अध्यक्ष डॉ. ममता त्यागी ने बताया कि संघ पिछले लगभग दस वर्षों से महावत बस्ती के निवासियों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा महिलाओं में एनीमिया और बच्चों में कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाइयों का वितरण लगातार किया जाता रहा है।
कार्यक्रम के अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने यह संकल्प भी लिया कि हर माह नियमित रूप से चिकित्सा सेवा दी जाएगी और बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। इस सेवा कार्यक्रम में डॉ. बी. बी. वाधवा, डॉ. ग्लैडबिन त्यागी, डॉ. अंकुर, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. बनारसी दास सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों के साथ समय बिताकर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आयोजन के अंत में सभी ने स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करने का संकल्प लिया।





