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उत्तर प्रदेश : इंदौर की घटना के बाद हापुड़ में पैकेज्ड पेयजल फैक्टरियों पर बड़ी कार्रवाई

Hapur News : इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद हापुड़ जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कमिश्नर के आदेश पर जिले में पिछले दो दिनों से लगातार बड़ी कार्रवाई की जा रही है। राज्य सचल दल की 20 अधिकारियों की टीम ने धौलाना के यूपीएसआईडीसी क्षेत्र में स्थित 12 पैकेजिंग पेयजल फैक्टरियों की जांच कर 18 नमूने लिए हैं। इस पूरे अभियान की निगरानी सीधे लखनऊ से की जा रही है और सभी नमूनों को जांच के लिए लखनऊ की प्रयोगशाला भेजा गया है।

धौलाना के यूपीएसआईडीसी क्षेत्र में कुल 19 पैकेजिंग पेयजल फैक्टरियां संचालित हैं, जहां से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग तीन लाख पानी की बोतलों की आपूर्ति की जाती है। इसके बावजूद क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से शुद्ध पेयजल को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायतों और इंदौर में हुई मौतों के बाद पैकेजिंग पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके चलते प्रशासन हरकत में आया।

कमिश्नर मोनिका सिंह के निर्देश पर राज्य सचल दल की टीम ने फैक्टरियों में नियमों के पालन की जांच करते हुए नमूने लिए। शुक्रवार की सुबह मेरठ से चार, अमरोहा से तीन, मुरादाबाद से सात और हापुड़ से चार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को कलेक्ट्रेट बुलाया गया। हापुड़ के सहायक आयुक्त द्वितीय सुनील कुमार और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज राय के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। कमिश्नर मोनिका सिंह लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ीं और जांच अभियान के स्पष्ट निर्देश दिए। किस अधिकारी को कहां जांच करनी है, इसके आदेश भी लखनऊ से ही जारी किए गए।

शुक्रवार को धौलाना के यूपीएसआईडीसी क्षेत्र की 12 पैकेजिंग पेयजल इकाइयों से 16 नमूने लिए गए, जबकि शनिवार को दो और नमूने एकत्र किए गए। जांच के दौरान दो फैक्टरियों में पैकेजिंग कार्य नहीं पाया गया और दो इकाइयां बंद मिलीं। अधिकारियों के अनुसार फैक्टरियों में सघन जांच की गई है और रविवार को भी यह कार्रवाई जारी रहेगी।

सहायक आयुक्त द्वितीय सुनील कुमार ने बताया कि दो दिनों में कुल 18 नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। पूरे मामले की निगरानी स्वयं आयुक्त द्वारा की जा रही है और जिलाधिकारी को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

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