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Delhi: खेल विज्ञान कार्यशाला से कॉम्बैट स्पोर्ट्स कोचों की क्षमता होगी मजबूत

Delhi: खेल विज्ञान कार्यशाला से कॉम्बैट स्पोर्ट्स कोचों की क्षमता होगी मजबूत

नई दिल्ली, 8 जनवरी। मुक्केबाजी, कुश्ती और जूडो जैसे कॉम्बैट स्पोर्ट्स में प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा एक चार दिवसीय खेल विज्ञान कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कोचों को आधुनिक खेल विज्ञान की तकनीकों से लैस करना है, ताकि दैनिक प्रशिक्षण पद्धतियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से शामिल किया जा सके और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी फिटनेस और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

कार्यशाला के दौरान साई के खेल विज्ञान प्रभाग के निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने कहा कि खेल विज्ञान आधारित कोचिंग प्रणाली भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक संभावनाओं को और अधिक मजबूत करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब प्रशिक्षण, रिकवरी और चोट प्रबंधन में विज्ञान का सही इस्तेमाल किया जाता है, तो एथलीट लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन कर सकते हैं।

इस अवसर पर सफदरजंग अस्पताल स्थित स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के निदेशक प्रोफेसर दीपक जोशी ने खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा के आपसी समन्वय को एथलीटों के करियर के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि समय पर सही उपचार, वैज्ञानिक पुनर्वास और सुरक्षित ‘रिटर्न-टू-प्ले’ किसी भी खिलाड़ी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण और स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, सफदरजंग अस्पताल के बीच पहले से चले आ रहे समझौता ज्ञापन की अवधि को आगे बढ़ाने की घोषणा भी की गई। इस करार के विस्तार से भारतीय खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज, पुनर्वास सेवाएं और चोट के बाद सुरक्षित तरीके से खेल में वापसी सुनिश्चित की जाएगी।

व्यावहारिक दृष्टिकोण पर आधारित इस कार्यशाला में स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग के खेल-विशिष्ट मॉडल, फंक्शनल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, प्लायोमेट्रिक्स, पीरियडाइज्ड रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और व्यायाम शरीर विज्ञान के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही कॉम्बैट स्पोर्ट्स में आमतौर पर होने वाली चोटों, विशेष रूप से कंधे की चोटों की रोकथाम और उनके प्रभावी प्रबंधन पर भी कोचों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खेल विज्ञान कार्यशालाएं न केवल कोचों की पेशेवर क्षमता बढ़ाती हैं, बल्कि खिलाड़ियों के समग्र विकास, बेहतर प्रदर्शन और लंबी खेल यात्रा के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होती हैं।

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