
Shivraj Singh Chauhan: अनुसंधान तभी सार्थक है जब उसका लाभ सीधे किसान के खेत तक पहुंचे: शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 4 जनवरी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उसका लाभ समय पर देश के किसानों तक पहुंचे। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए यह बात कही। नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस कार्यक्रम को भारतीय कृषि के भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल प्रयोगशालाओं में अनुसंधान कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नई तकनीक और उन्नत बीज किसानों के खेतों में दिखाई दें। उन्होंने स्पष्ट लक्ष्य तय करते हुए कहा कि आज जारी की गई सभी नई किस्में अधिकतम तीन वर्ष के भीतर किसानों तक पहुंचनी चाहिए ताकि उन्हें इसका वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि इस लक्ष्य को मिशन मोड में पूरा किया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत आज उस स्थिति में पहुंच चुका है जहां वह खाद्य-कमी वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य प्रदाता बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने चावल उत्पादन के क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़ते हुए 150.18 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि भारतीय किसानों, वैज्ञानिकों और नीतियों की संयुक्त सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और खेती की आत्मा बीज होता है, क्योंकि अच्छे और उन्नत बीज ही उत्पादन बढ़ाने, पोषण सुधारने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की मजबूत नींव रखते हैं।
इस अवसर पर डेयर सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि हाल के वर्षों में फसलों की नई किस्मों के विकास में अभूतपूर्व तेजी आई है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में अनुसंधान का मुख्य फोकस जलवायु-लचीली, बायोफोर्टिफाइड और टिकाऊ किस्मों पर रहेगा, ताकि बदलते मौसम और पर्यावरणीय चुनौतियों के बावजूद किसानों की आय और उत्पादन सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि बीज ट्रेसबिलिटी सिस्टम और तेज गुणन प्रणाली के माध्यम से अब नई किस्मों को किसानों तक पहले से कहीं अधिक तेजी से पहुंचाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नीति और तकनीक के बेहतर तालमेल से बीज वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
रविवार को जारी की गई नई किस्मों में अनाज, दालें, तिलहन, कपास, गन्ना और चारा फसलें शामिल हैं। ये किस्में जलवायु परिवर्तन, सूखा, लवणता, कीट और रोग जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने में किसानों की मदद करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उन्नत किस्मों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी सुधार होगा और देश की खाद्य सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।




