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Aeronautics 2047: बेंगलुरु में एडीए का राष्ट्रीय सेमिनार ‘एरोनॉटिक्स 2047’ शुरू, स्वदेशी एयरोस्पेस भविष्य पर मंथन

Aeronautics 2047: बेंगलुरु में एडीए का राष्ट्रीय सेमिनार ‘एरोनॉटिक्स 2047’ शुरू, स्वदेशी एयरोस्पेस भविष्य पर मंथन

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 4 जनवरी। एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘एरोनॉटिक्स 2047’ का शुभारंभ रविवार को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स में हुआ। इस महत्वपूर्ण सेमिनार का उद्घाटन भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। यह आयोजन भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के भविष्य, स्वदेशी तकनीकों और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को लेकर व्यापक विचार-विमर्श का मंच प्रदान कर रहा है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस की पहली उड़ान के 25 वर्ष पूरे होने पर एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एलसीए तेजस भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है और यह परियोजना देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि रही है। साथ ही उन्होंने बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए भारतीय वायु सेना की परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए रक्षा परियोजनाओं की समयबद्ध डिलीवरी की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

इस अवसर पर डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी कामत ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी और अत्याधुनिक एयरोस्पेस तकनीकों के विकास पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि ‘एरोनॉटिक्स 2047’ जैसे मंच देश को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सेमिनार के दौरान अगली पीढ़ी के विमानों की डिजाइन और विनिर्माण, डिजिटल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एवियोनिक्स, उन्नत उड़ान परीक्षण प्रणालियों और भविष्य की एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में एलसीए तेजस की स्केच से लेकर स्क्वाड्रन तक की पूरी यात्रा को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया, जिससे युवाओं और विशेषज्ञों को स्वदेशी विमान विकास की प्रेरणादायक कहानी जानने का अवसर मिला।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह सेमिनार भारत के एयरोस्पेस सेक्टर को वर्ष 2047 तक वैश्विक स्तर पर मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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