Yamuna River Pollution: यमुना में नाला का पानी अब शोधित किए बिना नहीं छोड़ा जाएगा, छह राज्यों ने किया बड़ा निर्णय

Yamuna River Pollution: यमुना में नाला का पानी अब शोधित किए बिना नहीं छोड़ा जाएगा, छह राज्यों ने किया बड़ा निर्णय
नोएडा। यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए छह राज्यों की महत्वपूर्ण बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। गुरुवार को सेक्टर-62 स्थित यमुना भवन में अपर यमुना रिवर बोर्ड (यूवाईआरबी) के कार्यालय में हुई नौवीं अपर यमुना रिव्यू कमेटी (यूवाईआरसी) की बैठक में तय किया गया कि अब यमुना में किसी भी नाले का पानी शोधित किए बिना नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए सभी राज्यों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, और केवल शुद्ध किए गए पानी को ही यमुना में छोड़ने की अनुमति होगी।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की। इसमें राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और हिमालय प्रदेश के उच्च अधिकारी एवं मंत्री शामिल हुए। राजस्थान से जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, उत्तराखंड से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, उत्तर प्रदेश से राज्य जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, हरियाणा से सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी, दिल्ली से राज्य जल शक्ति मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और हिमालय प्रदेश के मुख्य अभियंता अंजू शर्मा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद थे।
बैठक में यमुना नदी में बढ़ते जल प्रदूषण पर गहरी चिंता जताई गई। सभी राज्यों ने सहमति जताई कि अब किसी भी राज्य से यमुना में नाले का गंदा पानी सीधे नहीं छोड़ा जाएगा। पहले यह पानी एसटीपी के माध्यम से शोधित किया जाएगा, और केवल शोधित पानी ही नदी में छोड़ा जाएगा। हरियाणा में पहले से ही दो स्थानों पर यह प्रावधान लागू किया जा रहा है।
बैठक में हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को पानी भेजने का भी निर्णय लिया गया। इसके लिए राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सरकार तीन महीने के भीतर संयुक्त डीपीआर तैयार करके केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपेंगी, ताकि राजस्थान को पानी की आपूर्ति योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
साथ ही बैठक में यमुना को अतिक्रमण मुक्त बनाने की योजना पर भी जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश के राज्य जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उत्तराखंड में निर्माणाधीन लखवार बांध, रेणुकाजी और हिमाचल के किशाऊ बांध परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई, और अधिकारियों को जल्द ही कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पानी के वितरण और इससे उत्पन्न बिजली के बंटवारे पर भी चर्चा की गई।
यह निर्णय यमुना की सफाई, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और सभी राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने में भी मदद करेगा।
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