Himachal Health Services: सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को मिलेगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिए निर्देश
Himachal Health Services: सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को मिलेगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिए निर्देश
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) देने का निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आम लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार लगातार स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर इलाज की सुविधा उनके आसपास ही उपलब्ध करवाना है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य सुधारों को लेकर सरकार ने चिकित्सकों के साथ विस्तार से चर्चा की है। आने वाले समय में वह स्वयं विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा करेंगे और डॉक्टरों से संवाद कर स्वास्थ्य क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण की कार्ययोजना तैयार करेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त स्टाफ और आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाकर उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के स्तर की सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार आधुनिक चिकित्सा मशीनरी और उपकरणों की खरीद पर करीब 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां के क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों की सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकार के प्रयासों से प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। इससे पहले इस तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाना पड़ता था और अधिक खर्च उठाना पड़ता था।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का जनसंख्या के आधार पर वर्गीकरण किया जाए। इससे प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविक जरूरत के अनुसार डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को उनके घरों के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग में चल रही विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, जितेंद्र सांजटा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर, हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंगल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




