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New Delhi : दिल्ली सरकार ने सर्दियों के लिए प्रदूषण नियंत्रण रोडमैप अधिसूचित किया, नागरिकों और संस्थानों को मिली तैयारी की अग्रिम जानकारी

New Delhi : दिल्ली सरकार ने सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था अधिसूचित कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार अब तक आमतौर पर सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने या ग्रैप के तहत प्रतिबंध लागू होने के बाद ही लोगों को नई व्यवस्थाओं की जानकारी मिलती थी, जिससे नागरिकों, उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, निर्माण एजेंसियों, संस्थानों और अन्य हितधारकों को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। इस बार सरकार ने सर्दियों की शुरुआत से कई महीने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि नवंबर से फरवरी के दौरान प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं और विभिन्न क्षेत्रों से क्या अपेक्षाएं रहेंगी।

दिल्ली में पिछले कई वर्षों से नवंबर से फरवरी के बीच वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती रही है और एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है। इसलिए दिल्ली सरकार ने केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय अग्रिम तैयारी, समयबद्ध हस्तक्षेप और बेहतर समन्वय पर आधारित रणनीति अपनाई है। यह फ्रेमवर्क पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत अधिसूचित किया गया है और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी संशोधित ग्रेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के पूरक के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विभाग और एजेंसियां सर्दियों के महीनों में निरंतर तैयार रहें और प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रतिकूल परिस्थितियों के आने से पहले ही लागू किए जा सकें।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र होगा। इसके अतिरिक्त 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर बीएस-VI वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को इस व्यवस्था से छूट दी जाएगी। सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सुधारने और निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के उद्देश्य से 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। यातायात दबाव कम करने के लिए चरणबद्ध कार्यालय समय की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत सरकारी व निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति संबंधी प्रावधान लागू रहेंगे और शेष कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर सकेंगे। आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट रहेगी।

निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और धूल नियंत्रण उपायों के अनुरूप संचालन करना होगा। विशेष रूप से 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच जब प्रदूषण का स्तर अधिक रहने की संभावना होती है तब जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के हित में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। आवश्यक और आपातकालीन परियोजनाओं को इससे छूट दी जा सकती है। बड़े वाणिज्यिक ऊंचे भवनों और प्रमुख निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, मिस्ट सप्रेशन सिस्टम और अन्य धूल नियंत्रण उपायों की स्थापना एवं संचालन अनिवार्य होगा। खुले में कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सभी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, संस्थानों, प्रतिष्ठानों, ठेकेदारों और एजेंसियों को अपने क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाने होंगे। खुले में जलाने की घटनाओं की पहचान और रोकथाम के लिए फील्ड सर्विलांस और ड्रोन आधारित निगरानी को मजबूत किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति सहित लागू कानूनों के तहत कार्रवाई होगी। अधिसूचित दिशा-निर्देश प्रत्येक वर्ष सामान्यतः 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रभावी रहेंगे और ग्रैप के साथ समानांतर रूप से लागू होंगे।

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