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Noida District Hospital: रिश्वत लेने की आरोपी महिला कर्मी को दोबारा नौकरी देने के मामले में तीन दिन बाद भी नहीं बनी जांच समिति

Noida District Hospital: रिश्वत लेने की आरोपी महिला कर्मी को दोबारा नौकरी देने के मामले में तीन दिन बाद भी नहीं बनी जांच समिति

नोएडा। मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़ी महिला कर्मी को दोबारा नौकरी दिए जाने के मामले में तीन दिन बीत जाने के बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन जांच समिति का गठन नहीं कर सका है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए समिति गठित करने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जांच शुरू नहीं हो पाई है। इससे अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और मामले की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत लेने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आया और जिलाधिकारी के निर्देश पर इसकी जांच कराई गई थी। जांच के दौरान एक संविदाकर्मी की भूमिका सामने आने पर उसे नौकरी से हटा दिया गया था। वहीं मामले में नाम आने वाली एक महिला कर्मी भी अस्पताल से अनुपस्थित हो गई थी और लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं आई। हालांकि करीब दस महीने बाद आठ जून को उक्त महिला कर्मी को फिर से जिला अस्पताल में ज्वाइनिंग दे दी गई। आरोप है कि महिला कर्मी को दोबारा नियुक्त करने से पहले न तो मामले की कोई नई जांच कराई गई और न ही उस पर लगे आरोपों को लेकर कोई स्पष्ट रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इसी कारण अस्पताल प्रशासन के इस फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार मामला केवल एक महिला कर्मी तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल में ऐसे तीन अन्य कर्मियों को भी दोबारा नौकरी दिए जाने की चर्चा है, जिन पर पहले किसी न किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगे थे। इनमें से एक कर्मचारी के खिलाफ जांच अभी भी जारी बताई जा रही है, जबकि दो अन्य कर्मचारियों को पूर्व में जांच के बाद सेवा से हटाया जा चुका था। अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच किए बिना कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त किया जाता है तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। साथ ही कर्मचारियों और आम लोगों के बीच गलत संदेश भी जाएगा।

जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार झा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ और जानकार अधिकारियों की एक टीम गठित की जाएगी, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। उन्होंने बताया कि उपयुक्त सदस्यों के चयन में समय लगने के कारण अभी तक जांच समिति का गठन नहीं हो पाया है। समिति के गठन के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. झा ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य मामलों में जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उन्हें दोबारा नौकरी नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति का आवेदन जरूर प्राप्त हुआ था, लेकिन उसे नियुक्त नहीं किया गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सभी नियुक्तियां नियमों के अनुरूप की जा रही हैं और जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन द्वारा जांच समिति के गठन में हो रही देरी को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति का गठन कब होता है और आरोपों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।

 

 

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