Betting App Scam: बेटिंग ऐप के जरिए 500 से अधिक लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
Betting App Scam: बेटिंग ऐप के जरिए 500 से अधिक लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
नोएडा। सेक्टर-113 थाना पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह देशभर में 500 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपियों को सेक्टर-79 स्थित एक सोसायटी में किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन लैपटॉप, 26 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड, दो पैन कार्ड तथा तीन वाई-फाई राउटर बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) मनीषा सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि एक संगठित गिरोह ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से लोगों को ठग रहा है। सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी जांच के आधार पर सेक्टर-79 स्थित एक फ्लैट में छापेमारी की, जहां से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद निवासी साई कुमार, आंध्र प्रदेश के कुमुदबल्ली गांव निवासी पंडाला सतीश, भीमावरम निवासी पांडुरंगा तथा गुंटूर के गाजुला पालम निवासी उदय कुमार के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने और अधिक मुनाफा कमाने का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट और मोबाइल ऐप से जोड़कर निवेश कराने के नाम पर ठगी की जाती थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया है। बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को “लक्ष्मी ट्रेडर्स” नामक बैंक खाते के माध्यम से लगभग 2.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा कई अन्य बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह का मुख्य सरगना हैदराबाद में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वह किसी गुप्त स्थान से काम कर रहा है और लगातार गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क में था। सरगना ही उन्हें लोगों को फंसाने, खातों का इस्तेमाल करने और रकम ट्रांसफर करने के निर्देश देता था। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सरगना तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले तीन माह से नोएडा के सेक्टर-79 स्थित एक नामी सोसायटी में किराए पर रह रहे थे। इसके लिए उन्होंने लगभग 40 हजार रुपये प्रतिमाह किराया तय किया था। चारों आरोपी अधिकतर समय फ्लैट के अंदर ही रहते थे और बाहर बहुत कम निकलते थे। भोजन सहित अन्य आवश्यक वस्तुएं भी ऑनलाइन मंगवाई जाती थीं ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी का ध्यान न जाए। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि चारों आरोपी अधिक शिक्षित नहीं हैं। साई कुमार और पांडुरंगा दसवीं पास हैं, जबकि पंडाला सतीश और उदय कुमार बारहवीं तक पढ़े हुए हैं। आरोपियों ने बताया कि लगभग पांच माह पहले वे गिरोह के सरगना के संपर्क में आए थे। जल्दी पैसा कमाने और महंगी जीवनशैली अपनाने की चाह में उन्होंने साइबर ठगी का रास्ता चुन लिया। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111, 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से डाटा रिकवर कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन-किन लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया, कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
