Noida illegal colony: हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनी बसाने का आरोप, सरकारी जमीन पर प्लॉटिंग का मामला दर्ज

Noida illegal colony: हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनी बसाने का आरोप, सरकारी जमीन पर प्लॉटिंग का मामला दर्ज
नोएडा के हिंडन नदी तटवर्ती डूब क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी विकसित करने का गंभीर मामला सामने आया है। गाजियाबाद सिंचाई विभाग में कार्यरत अधिकारी की शिकायत पर एक नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि बाढ़ संभावित क्षेत्र में न केवल अवैध प्लॉटिंग की जा रही है, बल्कि लोगों को गुमराह कर जमीन बेचने का काम भी चल रहा है।
शिकायतकर्ता सींचपाल राजेंद्र चंद्र ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2010 में शासन द्वारा नदियों के बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण रोकने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इन्हीं निर्देशों के तहत हिंडन नदी के दाएं किनारे पर तटवर्ती बांध का निर्माण किया गया, ताकि नोएडा को संभावित बाढ़ से सुरक्षित रखा जा सके। यह बांध सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
शिकायत में कहा गया है कि गांव हैबतपुर स्थित खसरा नंबर-350 डूब क्षेत्र की जमीन है, जहां निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। आरोप है कि बहलोलपुर निवासी रामवीर यादव इस डूब क्षेत्र में पुस्ता रोड के पास अवैध रूप से कॉलोनी विकसित कर रहा है। इतना ही नहीं, वह लोगों को यह कहकर भूखंड बेच रहा है कि जमीन सुरक्षित है, जबकि वास्तविकता में यह क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में बाढ़ आती है तो यहां बने मकान पूरी तरह जलमग्न हो सकते हैं, जिससे लोगों की जान-माल को बड़ा खतरा उत्पन्न होगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 20 जनवरी को उन्होंने सहायक कर्मचारी धीरज कुमार के साथ मौके पर पहुंचकर आरोपी और उसके सहयोगियों को निर्माण कार्य रोकने और नियमों का पालन करने के लिए समझाने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी और विरोध किया।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए तो अवैध निर्माण को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि किसी भी भूखंड को खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति और भू-उपयोग की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि भविष्य में किसी कानूनी या प्राकृतिक जोखिम का सामना न करना पड़े।




