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युवक को बुखार में पैरासिटामोल खाना पड़ा भारी

युवक को बुखार में पैरासिटामोल खाना पड़ा भारी

अमर सैनी

नोएडा। ग्रेटर नोएडा में एक युवक को खुद को डॉक्टर समझना भारी पड़ गया। अब हालत ऐसी है कि उसे अपनी जिंदगी को बचाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। दरअसल,दादरी निवासी एक मरीज ने लगातार बुखार रहने पर एक महीने तक खुद से पैरासिटामोल की गोलियां खा लीं। इसके बावजूद बुखार नहीं गया, जिसके बाद जब उसकी जांच कराई गई तो मलेरिया की पुष्टि हुई। पिछले दो दिनों से मरीज का इलाज चल रहा है।
रेलवे रोड निवासी मरीज एक महीने से बुखार से पीड़ित था। इसलिए वह मेडिकल स्टोर से पैरासिटामोल लेता रहा। दवा लेने के दो-तीन दिन बाद बुखार चला गया। एक-दो दिन बाद फिर बुखार आ गया। एक महीने तक मरीज की हालत ऐसी ही रही। इस दौरान वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गया था। इस मरीज की जानकारी मलेरिया विभाग को मिली, जिस पर उन्होंने मरीज की जांच की। जांच में मरीज सामान्य मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम वाइवैक्स से पीड़ित पाया गया। अगर मरीज में प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी होता तो व्यक्ति की जान भी जा सकती थी। मरीज की पत्नी की भी जांच कराई गई, क्योंकि उसे तीन दिन से बुखार था। वह भी मलेरिया से पीड़ित पाई गई।

लंबे समय तक खुद दवा लेना जानलेवा
जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि किसी भी तरह का बुखार होने पर खुद दवा न लें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें। लंबे समय तक खुद दवा लेना जानलेवा हो सकता है। मलेरिया विभाग ने जारी की गाइडलाइन मलेरिया विभाग ने इस मामले के बाद नई गाइडलाइन जारी की है, ताकि ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके।

डेंगू और मलेरिया की जांच जरूरी
जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि लक्षण मिलने पर जल्द से जल्द मलेरिया की जांच कराएं। साथ ही लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में बुखार आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर डेंगू और मलेरिया की जांच कराएं। ये जांच निशुल्क हैं।

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