
Haryana Budget: केंद्रीय बजट से हरियाणा की प्रगति का मार्ग और होगा प्रशस्त: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
रिपोर्ट: कोमल रमोला
चंडीगढ़, 10 जनवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित बजट पूर्व बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिस्सा लिया। इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय बजट में हरियाणा से जुड़ी कई अहम मांगें रखीं और कहा कि आने वाला केंद्रीय बजट प्रदेश की प्रगति के रास्ते को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि हरियाणा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में अपनी पूरी भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में अपेक्षित परिणामों तक पहुंचने के लिए केंद्र सरकार की आर्थिक सहायता बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत पर्याप्त सहयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने हरियाणा को कृषि प्रधान राज्य बताते हुए कहा कि प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और इसे देश का ब्रेड बास्केट भी कहा जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में करीब छह लाख एकड़ भूमि सेम की समस्या से प्रभावित है, जिससे खेती को नुकसान हो रहा है। इस भूमि को और अधिक क्षति से बचाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय सहायता की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने कृषि के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए डिजिटल एग्रीकल्चर, माइक्रो इरीगेशन, एग्री लॉजिस्टिक्स और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई, ताकि किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा जा सके और उनकी आय में बढ़ोतरी हो।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा का एनसीआर क्षेत्र लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे देश के प्रमुख बाजारों से कनेक्टिविटी और आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी। इसके लिए अधिक केंद्रीय पूंजी निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई और स्टार्टअप्स के बिना अर्थव्यवस्था को गति नहीं दी जा सकती। हरियाणा स्टार्टअप्स के मामले में देश में चौथे स्थान पर है और सरकार 2,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स स्थापित करने जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में 10 नए आईएमटी विकसित करने की योजना है, जिससे एमएसएमई और स्टार्टअप्स को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और भारी निवेश आएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार 44 लाख से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दे रही है और इस मद में भी केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग की गई है। ग्रामीण विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए आरआईडीएफ के तहत सामान्य आवंटन को वित्त वर्ष 2026-27 में 2,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं यूआईडीएफ के तहत परियोजनाओं की मौजूदा 100 करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये किए जाने की जरूरत है, ताकि बड़े विकास कार्यों में बाधा न आए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मानव पूंजी निवेश आज की सबसे बड़ी जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास विकसित राष्ट्र की नींव होते हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, ग्रीन टेक्नोलॉजी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से छोटा राज्य होने के बावजूद हरियाणा देश की जीडीपी में 3.7 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। कर संग्रह के मामले में भी प्रदेश अग्रणी है और प्रति व्यक्ति जीएसटी संग्रह में देश में पहले स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल जीएसटी संग्रह में हरियाणा का योगदान 7.32 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस आम बजट में हरियाणा से जुड़ी मांगों को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे प्रदेश और तेज गति से विकास कर सकेगा।
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