उत्तर प्रदेश : यक्ष ऐप से अपराधियों पर पुलिस का शिकंजा, मेरठ रेंज में 1.06 लाख अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

Hapur/Meerut : मेरठ परिक्षेत्र में अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित “यक्ष (YAKSH) ऐप” का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में लॉन्च किए गए इस ऐप के माध्यम से अपराधियों का डिजिटल अभिलेखीकरण, सत्यापन और उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी बल्कि बीट पुलिसिंग व्यवस्था भी मजबूत होगी।
रेंज स्तर पर इस ऐप के क्रियान्वयन के तहत वर्ष की शुरुआत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को ऐप के उद्देश्य और इसके प्रभावी उपयोग के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। निर्देशों के अनुसार जघन्य और सनसनीखेज अपराधों की रोकथाम के लिए अपराधियों का शत-प्रतिशत डेटा ऐप में दर्ज करने और उनका नियमित सत्यापन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
मेरठ रेंज में अब तक कुल 5863 ग्राम और मोहल्लों का 100 प्रतिशत डेटा ऐप में फीड किया जा चुका है। इनमें मेरठ जिले के 2461, बुलंदशहर के 2170, बागपत के 435 और हापुड़ के 797 ग्राम और मोहल्ले शामिल हैं।
यक्ष ऐप में अब तक मेरठ रेंज के कुल 1,06,092 अपराधियों का डेटा दर्ज किया जा चुका है, जिनमें से लगभग 70 हजार अपराधियों का सत्यापन भी पूरा कर लिया गया है। जिला मेरठ में 42,677 अपराधियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है, जिनमें से 22,500 का सत्यापन किया जा चुका है। बुलंदशहर में 34,909 अपराधियों का डेटा दर्ज है, जिनमें 31,300 सत्यापित हो चुके हैं। बागपत में 10,411 अपराधियों में से 8,260 का सत्यापन किया गया है, जबकि हापुड़ में दर्ज 18,095 अपराधियों में से 7,970 का सत्यापन पूरा किया गया है।
यक्ष ऐप की मदद से किसी भी जिले में अपराध करने वाले अपराधी का रिकॉर्ड दर्ज होते ही संबंधित थाने को स्वतः जानकारी मिल जाती है। ऐप के माध्यम से बीट व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है तथा हर थाना और क्षेत्र के टॉप-10 अपराधियों का चयन पारदर्शी और डेटा आधारित प्रक्रिया से किया जाएगा, जिससे निगरानी और कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।
इस ऐप में एआई आधारित फेसियल रिकग्निशन और वॉयस सर्च जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं, जिनकी मदद से संदिग्ध अपराधियों की पहचान आसान हो जाएगी। यदि कोई अपराधी नाम बदलकर या फर्जी पहचान के साथ फरार रहता है तो भी चेहरे के मिलान के जरिए उसकी पहचान संभव हो सकेगी। किसी भी जघन्य या सनसनीखेज घटना के बाद ऐप के डेटाबेस से संभावित अपराधियों की जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकेगी।
यक्ष ऐप का मुख्य उद्देश्य बीट स्तर पर जवाबदेही तय करना है, जिसके तहत “बीट के अपराधी की जिम्मेदारी बीट सिपाही” के सिद्धांत पर काम किया जा रहा है। इसके माध्यम से हिस्ट्रीशीटर, वांछित और इनामी अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही अपराधियों के नेटवर्क और गैंग संरचना का डेटा आधारित विश्लेषण कर पुलिस कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार यक्ष ऐप आधुनिक तकनीक पर आधारित स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने, नियमित सत्यापन होने और बीट स्तर पर जवाबदेही तय होने से अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।





