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World Hearing Day 2026: शोर प्रदूषण से बच्चों से लेकर वयस्कों तक प्रभावित हो रही श्रवण शक्ति

World Hearing Day 2026: शोर प्रदूषण से बच्चों से लेकर वयस्कों तक प्रभावित हो रही श्रवण शक्ति

नई दिल्ली, 6 मार्च : World Hearing Day 2026 के अवसर पर Dr. Ram Manohar Lohia Hospital में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सुनने से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान और रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अस्पताल के ईएनटी एवं हेड-एंड-नेक सर्जरी विभाग की ओर से किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और वयस्कों में तेजी से बढ़ रही सुनने की समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान ईएनटी विशेषज्ञ Ankur Gupta ने बताया कि मौजूदा समय में ध्वनि प्रदूषण तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। तेज आवाज वाले वातावरण, लाउड म्यूजिक, ट्रैफिक शोर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण छोटे बच्चों से लेकर वयस्कों तक की श्रवण शक्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें कम सुनाई देना, कान से पानी आना या कान में संक्रमण जैसी समस्याएं हो रही हैं।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि जन्म से सुनने में अक्षम बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट एक प्रभावी उपचार विकल्प बनकर सामने आया है। Cochlear Implant के माध्यम से ऐसे बच्चों की सुनने की क्षमता को काफी हद तक बहाल किया जा सकता है। आरएमएल अस्पताल में अब तक 125 जन्मजात बधिर बच्चों को यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे कई बच्चों को सामान्य जीवन जीने का अवसर मिला है।

कार्यक्रम की शुरुआत ईएनटी ओपीडी में आयोजित इंटरएक्टिव सत्रों से हुई, जिसमें मरीजों और उनके परिजनों को बहरापन, कानों की स्वच्छता और सुरक्षित सुनने की आदतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में जागरूकता बढ़ाने के लिए पंपलेट वितरित किए गए और नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया गया, जिससे आम लोगों तक यह संदेश प्रभावी तरीके से पहुंच सके।

इस दौरान आयोजित वैज्ञानिक सत्र में Sunita Sharma ने राष्ट्रीय बधिरता नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में सुनने की समस्या की समय पर पहचान के लिए स्कूल स्तर पर नियमित श्रवण जांच को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। इससे शुरुआती अवस्था में ही समस्या का पता लगाकर इलाज संभव हो सकेगा।

कार्यक्रम में अस्पताल के निदेशक Ashok Kumar, एमडी Vivek Diwan समेत 100 से अधिक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कॉक्लियर इम्प्लांट, बच्चों में श्रवण जांच, शोर से होने वाली सुनने की हानि और सामुदायिक स्तर पर कानों की देखभाल जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुनने से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जाए, तो बच्चों और वयस्कों दोनों में गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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