
Upendra Dwivedi: थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज का दौरा किया, सेना में सुधार और थिएटराइजेशन पर दिया जोर
New Delhi / Wellington में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की रणनीतिक तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देते हुए Upendra Dwivedi, जो Indian Army के थलसेना प्रमुख हैं, ने सोमवार को Defence Services Staff College, वेलिंगटन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारियों को संबोधित करते हुए भारतीय सेना में चल रहे प्रमुख सुधारों, थिएटराइजेशन की दिशा में हो रही प्रगति और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दौरे के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, इसलिए भारतीय सेना भी अपनी संरचना, क्षमताओं और सिद्धांतों में लगातार बदलाव कर रही है। उन्होंने बताया कि सेना में चल रहे संगठनात्मक सुधारों का उद्देश्य इसे अधिक सक्षम, लचीला और आधुनिक बनाना है, ताकि भविष्य की जटिल सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से थिएटराइजेशन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। थिएटराइजेशन के माध्यम से सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को एकीकृत ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
जनरल द्विवेदी ने सैन्य कूटनीति की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में रक्षा सहयोग केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, संयुक्त प्रशिक्षण और रणनीतिक संवाद के माध्यम से भी देशों के बीच सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। इस तरह के प्रयास भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशनल क्षमता को मजबूत बनाने के लिए सेना आधुनिक तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण और रणनीतिक सोच पर विशेष ध्यान दे रही है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध और सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों प्रकार की हो सकती हैं, इसलिए सेना को हर स्तर पर तैयार रहना होगा।
दौरे के दौरान थलसेना प्रमुख ने कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों, तीनों सेनाओं के अधिकारियों और मित्र देशों से आए कोर्स प्रतिभागियों से भी बातचीत की। उन्होंने बदलते रणनीतिक वातावरण में पेशेवर सैन्य सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार इस तरह के संस्थान सैन्य नेतृत्व को विकसित करने और रणनीतिक सोच को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए चयनित सैन्यकर्मियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की ताकत उसके समर्पित और प्रशिक्षित सैनिकों में निहित है, जो देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे और संवाद न केवल सेना के भीतर पेशेवर क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों को भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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