Tourism Impact: पश्चिम एशिया तनाव का असर, समर वेकेशन में विदेश यात्रा महंगी और मुश्किल

Tourism Impact: पश्चिम एशिया तनाव का असर, समर वेकेशन में विदेश यात्रा महंगी और मुश्किल
ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक पर्यटन उद्योग पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। समर वेकेशन के दौरान विदेश घूमने की योजना बना रहे हजारों भारतीय अब अपने प्लान बदलने को मजबूर हो गए हैं। बढ़ते खतरे, महंगी फ्लाइट्स और अनिश्चित हालात के चलते लोग प्री-बुकिंग तक कैंसिल करा रहे हैं।
ट्रेवल एजेंसियों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में विदेश यात्रा से जुड़ी क्वेरी में भारी बदलाव आया है। अब लोग बुकिंग से ज्यादा सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं कि मौजूदा हालात में विदेश यात्रा करना कितना सुरक्षित है। एजेंसियां भी यात्रियों को सलाह दे रही हैं कि वे मई-जून तक इंतजार करें और हालात सामान्य होने के बाद ही यात्रा की योजना बनाएं।
इस स्थिति का सीधा असर लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों पर पड़ा है। मलेशिया, थाईलैंड, दुबई, सिंगापुर, तुर्की, बाली और श्रीलंका जैसे डेस्टिनेशन के लिए फ्लाइट किराए में भारी उछाल दर्ज किया गया है। उड़ानों के रूट बदलने और लंबी दूरी तय करने के कारण यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है, जिससे यात्रा और भी थकाऊ हो गई है।
एविएशन सेक्टर में बढ़ती लागत और रूट डायवर्जन के चलते टिकट कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ट्रेवल एजेंसियों का कहना है कि युद्ध के चलते उनके कारोबार पर भी गहरा असर पड़ा है। पिछले दो महीनों में बुकिंग में भारी गिरावट आई है और कई एजेंसियों का कारोबार घटकर लगभग 5 प्रतिशत तक सिमट गया है।
हालांकि, विदेश यात्रा महंगी होने के बावजूद घरेलू पर्यटन भी इस बार सस्ता विकल्प साबित नहीं हो रहा है। कई रूट्स पर किराए में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे लोगों का बजट बिगड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली से गोवा और मुंबई जैसे रूट्स पर किराए में बदलाव देखने को मिला है, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा का खर्च और भी ज्यादा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो इसका असर आने वाले महीनों में भी पर्यटन उद्योग पर बना रहेगा। ऐसे में यात्रियों को अपनी योजनाएं सोच-समझकर बनानी होंगी और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।





