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Silver Price Crash After Record Rally: चांदी में 6 दिन की ₹46,000 तेजी के बाद भारी गिरावट, आगे क्या ₹3 लाख का स्तर होगा पार?

Silver Price Crash After Record Rally: चांदी में 6 दिन की ₹46,000 तेजी के बाद भारी गिरावट, आगे क्या ₹3 लाख का स्तर होगा पार?

भारत में चांदी की कीमतों में छह दिनों तक लगातार रिकॉर्ड तेजी के बाद पहली बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 16 जनवरी को चांदी के भाव में अचानक कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों और बाजार सहभागियों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या आने वाले दिनों में कीमतों में और कमजोरी देखने को मिलेगी। बीते कुछ दिनों में चांदी ने न सिर्फ नया ऑल-टाइम हाई बनाया, बल्कि सोने की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन भी किया है।

16 जनवरी को 1 किलोग्राम चांदी की कीमत में करीब 3,000 रुपये की गिरावट आई और भाव 2.92 लाख रुपये पर आ गया, जबकि इससे एक दिन पहले चांदी 2.95 लाख रुपये के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुकी थी। इसी तरह 100 ग्राम चांदी की कीमत 300 रुपये घटकर 29,200 रुपये और 10 ग्राम चांदी की कीमत 30 रुपये की गिरावट के साथ 2,920 रुपये पर पहुंच गई। 8 ग्राम चांदी 24 रुपये सस्ती होकर 2,336 रुपये और 1 ग्राम चांदी 3 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 292 रुपये पर कारोबार करती नजर आई।

देश के अलग-अलग शहरों में चांदी की कीमतों में भी अंतर देखा गया। चेन्नई, हैदराबाद और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में 1 किलोग्राम चांदी का भाव 3 लाख रुपये के पार जाकर 3,06,000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में चांदी की कीमत 2,92,000 रुपये के आसपास बनी हुई है।

इस गिरावट से पहले 10 जनवरी से 15 जनवरी के बीच चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। महज छह दिनों में 1 किलोग्राम चांदी के दाम करीब 46,000 रुपये तक बढ़ गए थे। जनवरी महीने में अब तक चांदी ने सोने को साफ तौर पर पछाड़ते हुए करीब 23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में सोने की कीमतों में लगभग 6.2 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट मुनाफावसूली का नतीजा हो सकती है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सिल्वर ने 93.70 डॉलर का उच्च स्तर छूने के बाद 90 डॉलर के आसपास मजबूती बनाई हुई है। मजबूत तेजी के बाद कीमतें अब भी अपने अल्पकालिक और मध्यम अवधि के औसत से ऊपर बनी हुई हैं, जो यह दर्शाता है कि बाजार में खरीदारों का दबदबा कायम है।

उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की संरचनात्मक मांग लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में भी चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि हालिया चार्ट में बने हैंगिंग मैन कैंडलस्टिक पैटर्न से निकट भविष्य में कुछ और मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन समग्र रुख अब भी सकारात्मक है।

कॉमेक्स बाजार में 85 डॉलर के स्तर पर चांदी को अस्थायी समर्थन मिल सकता है, जबकि 86 से 88 डॉलर के ऊपर मजबूती बने रहने पर कीमतें तेजी से 93 से 97 डॉलर के दायरे की ओर बढ़ सकती हैं। मध्यम अवधि में 80 से 83 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 2026 तक चांदी का आउटलुक संरचनात्मक रूप से तेज बना हुआ है और आपूर्ति में कमी तथा औद्योगिक मांग में इजाफे के चलते इसके दाम 100 डॉलर के पार भी जा सकते हैं।

घरेलू बाजार की बात करें तो एमसीएक्स पर चांदी हाल ही में 2,92,960 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद फिलहाल 2,87,000 रुपये के आसपास कारोबार कर रही है। बाजार एक मजबूत तेजी के चैनल में बना हुआ है और हर गिरावट पर खरीदारी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2,90,000 रुपये के ऊपर टिके रहने पर चांदी में तेजी का रुझान बरकरार रहेगा।

अगर एमसीएक्स पर चांदी 2,92,000 रुपये के स्तर के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देती है, तो आने वाले समय में 3,00,000 रुपये और उससे ऊपर के स्तर देखने को मिल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, अगर कीमतें 2,85,000 रुपये के नीचे फिसलती हैं, तो 2,80,000 रुपये के आसपास एक मजबूत सपोर्ट जोन बन सकता है, जहां से दोबारा खरीदारी उभरने की संभावना है। कुल मिलाकर मौजूदा गिरावट के बावजूद बाजार विशेषज्ञ चांदी को लेकर दीर्घकाल में अब भी सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं।

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