Safdarjung Hospital: सफदरजंग अस्पताल में न्यूरोमॉड्यूलेशन ट्रीटमेंट की शुरुआत

Safdarjung Hospital: सफदरजंग अस्पताल में न्यूरोमॉड्यूलेशन ट्रीटमेंट की शुरुआत
-डिप्रेशन, नशे की लत, ओसीडी और सिजोफ्रेनिया मरीजों को मिलेगा बिल्कुल मुफ्त इलाज
-मानसिक रोगियों को अब आरटीएमएस, एमईसीटी और टीडीसीएस थेरेपी से मिलेगा इलाज
नई दिल्ली, 7 दिसम्बर : डिप्रेशन, नशे की लत, ओसीडी और सिजोफ्रेनिया के प्रभावी इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ने न्यूरोमॉड्यूलेशन सेवाओं की शुरुआत की है। इस अत्याधुनिक सेवा के जरिये ऐसे मरीजों का निशुल्क इलाज किया जाएगा जो लंबे समय से दवाएं और चिकित्सा परामर्श लेने के बावजूद मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं।
चिकित्सा निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि अक्सर कई मरीज लंबे समय तक इलाज के बावजूद मानसिक विकारों से पीड़ित रहते हैं और गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। ऐसे में मनोचिकित्सा विभाग में स्थापित नई मशीनें मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। इस तकनीक से इलाज के दौरान मरीज अस्पताल में भर्ती हुए बिना और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को जारी रखते हुए इलाज ले सकेंगे। उन्होंने कहा, मानसिक रोग एक सामान्य रोग है। यह शर्म या झिझक का विषय नहीं है। इलाज कराने में कोताही ना बरतें। इस अवसर पर एमएस डॉ चारु बाम्बा और मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ पंकज वर्मा मौजूद रहे।
डॉ वर्मा के मुताबिक न्यूरोमॉड्यूलेशन सर्विसेज में कई तरह की मशीनें इस्तेमाल होती हैं, जो कट या चीरे वाली (इनवेसिव) और बिना कट या बिना चीरे वाली (नॉन इनवेसिव) होती हैं। फिलहाल नॉन इनवेसिव मशीनों के जरिये मानसिक रोगों का इलाज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिनमें रिपैरेटिव ट्रांसक्रेनियल मेग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस) मॉडिफाइड इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी (एमईसीटी) और ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (टीडीसीएस) जैसी आधुनिक मशीनें शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल या मैग्नेटिक स्टिमुलेशन का उपयोग होता है।
कौन सी मशीन क्या करती है ?
आरटीएमएस में चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं को उत्तेजित किया जाता है, मुख्य रूप से डिप्रेशन और ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के इलाज के लिए। टीडीसीएस में मस्तिष्क को उत्तेजित करने के लिए कम-तीव्रता वाले विद्युत धारा का उपयोग किया जाता है। एमईसीटी एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार है जिसमें सामान्य एनेस्थीसिया और मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा देकर, मस्तिष्क को एक नियंत्रित विद्युत प्रवाह से उत्तेजित किया जाता है, जिससे एक छोटा दौरा (सीजर) आता है। यह गंभीर अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया जैसी स्थितियों में काम आता है जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं, इसमें दर्द या असुविधा नहीं होती है।
‘कोटा फैक्ट्री’ सीजन 3: जितेंद्र कुमार की दमदार ड्रामा नेटफ्लिक्स पर आएगी, रिलीज डेट सामने आई





