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Plastic Waste Management: प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर, नई तकनीकों का हुआ प्रदर्शन

Plastic Waste Management: प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर, नई तकनीकों का हुआ प्रदर्शन

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत मंडपम में आयोजित ‘प्लास्टिक पुनर्चक्रण और सततता पर तीसरे वैश्विक सम्मेलन (जीसीपीआरएस)’ का चार दिवसीय आयोजन शुरू हो गया है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन, रीसाइक्लिंग तकनीकों और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना है। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं तथा प्लास्टिक कचरे के समाधान से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

सम्मेलन का उद्घाटन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे की बढ़ती चुनौती किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने मौजूद गंभीर पर्यावरणीय संकट है। इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित और संगठित प्रयासों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न देश अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग नीतियों और तकनीकों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे का समाधान खोज रहे हैं, लेकिन अब आवश्यकता इस बात की है कि संयुक्त राष्ट्र प्लास्टिक संधि जैसे वैश्विक ढांचों के अनुरूप एक समान व्यवस्था विकसित की जाए। इससे प्लास्टिक के उत्पादन से लेकर उपयोग, संग्रहण, पुनर्चक्रण और अंतिम निपटान तक एक मानकीकृत प्रणाली लागू की जा सकेगी।

तेजवीर सिंह ने यह भी कहा कि दुनिया भर में विकसित हो रही आधुनिक और सफल तकनीकों को अपनाकर भारत अपने कचरा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी बना सकता है। उन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत कचरा संग्राहकों की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें औपचारिक व्यवस्था से जोड़कर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को अधिक मजबूत और समावेशी बनाया जा सकता है।

सम्मेलन के दौरान सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, प्लास्टिक के पुनः उपयोग, टिकाऊ उत्पादन प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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