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Noida: फर्जी डीलर बनकर स्टूडियो अपार्टमेंट बुकिंग में 24 लाख की ठगी, आरोपी हनु गर्ग को कोर्ट से नहीं मिली जमानत

Noida: फर्जी डीलर बनकर स्टूडियो अपार्टमेंट बुकिंग में 24 लाख की ठगी, आरोपी हनु गर्ग को कोर्ट से नहीं मिली जमानत

नोएडा। रियल एस्टेट में धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में अदालत ने आरोपी हनु गर्ग की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने मामले की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और ऐसे में आरोपी को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा। आरोपी के खिलाफ थाना बिसरख में धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी हनु गर्ग ने खुद को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-18 स्थित फ्यूजन यूफेरिया प्रोजेक्ट का अधिकृत डीलर बताते हुए एक व्यक्ति से 24 लाख रुपये की ठगी की थी। 13 अप्रैल 2025 को आरोपी ने वादी से संपर्क किया और उसे फ्यूजन यूफेरिया प्रोजेक्ट में एक स्टूडियो अपार्टमेंट दिखाया। आरोपी ने दावा किया कि वह गर्ग रियल एस्टेट नामक कंपनी का मालिक है और फ्यूजन यूफेरिया का अधिकृत डीलर है।

विश्वास में लेने के लिए आरोपी ने यूनिट का नक्शा, लेआउट प्लान और अन्य दस्तावेज दिखाए। इसके साथ ही उसने एक कथित अधिकृत डीलर प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत किया, जिस पर कंपनी की मोहर और अधिकारियों के हस्ताक्षर बताए गए थे। इन दस्तावेजों पर भरोसा कर वादी ने अपनी पत्नी और पुत्र के नाम पर स्टूडियो अपार्टमेंट बुक करा दिया और 50 हजार रुपये की बुकिंग राशि सहित कुल 24 लाख रुपये मारिया एंटरप्राइजेज के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।

बाद में जब वादी ने फ्यूजन यूफेरिया प्रोजेक्ट के आधिकारिक सेल्स कार्यालय से संपर्क किया तो उसे जानकारी मिली कि हनु गर्ग नाम का कोई भी व्यक्ति कंपनी का अधिकृत डीलर नहीं है। इस खुलासे के बाद वादी ने स्वयं को ठगे जाने का एहसास किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद को अधिकृत डीलर बताकर रकम हासिल की थी।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि सह-आरोपियों द्वारा आरोपी के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया है और आरोपी ने ठगी की रकम का एक हिस्सा वापस भी कर दिया है। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि ठगी की गई धनराशि का बड़ा हिस्सा सीधे आरोपी के खाते में गया है और बाद में आरोपी ने सह-आरोपियों को भी रकम ट्रांसफर की। इससे आरोपी की सक्रिय भूमिका स्पष्ट होती है। अभियोजन ने यह भी कहा कि मामला संगठित धोखाधड़ी का है और यदि आरोपी को जमानत दी गई तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता सामने आती है। फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में रहना होगा और मामले की आगे जांच जारी रहेगी।

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