Noida engineer death case: इंजीनियर मौत मामले में लखनऊ तक हिला तंत्र, शहर के बीच तैयार हो गई दलदल

Noida engineer death case: इंजीनियर मौत मामले में लखनऊ तक हिला तंत्र, शहर के बीच तैयार हो गई दलदल
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे गहरे पानी में कार समेत गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। यह दर्दनाक हादसा अब सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गौतमबुद्ध नगर में उजागर हुई अव्यवस्थाओं के बाद लखनऊ तक सरकारी तंत्र को झकझोर चुका है। शहर के बीचोंबीच तैयार हुई इस खतरनाक दलदल ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद से आम लोगों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और सिस्टम की नाकामी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इतना ही नहीं, सेक्टरों, सोसायटियों और आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं। लोग अपनी आंखों से यह देखना चाहते हैं कि आखिर कैसे शहर के बीचोंबीच ऐसा जानलेवा गड्ढा बन गया, जहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर सरकारी मशीनरी के सामने ही काल के मुंह में समा गया। हादसे के बाद से प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभाग पूरी तरह से कठघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इस एसआईटी को पांच दिन के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी है। तय समयसीमा आज पूरी हो रही है, ऐसे में प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज है। एसआईटी ने पुलिस और प्रशासन से कई अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। बृहस्पतिवार को दिनभर पुलिस अधिकारी जांच से जुड़ी रिपोर्ट तैयार कराने में जुटे रहे।
एसआईटी की जांच का मुख्य फोकस यह है कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई, निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे और हादसे के बाद बचाव दल समय रहते युवराज को क्यों नहीं बचा सका। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
एसआईटी के समानांतर पुलिस की जांच भी लगातार जारी है। बेसमेंट से कार बाहर निकाले जाने के बाद वाहन की फोरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस ने नोएडा एक्सप्रेसवे और आसपास की सोसायटियों में लगे सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि कई कैमरों में युवराज की कार कैद हुई है, जिससे उनकी कार की गति, रास्ता और हादसे से पहले की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मॉल के लिए खोदा गया बेसमेंट का गड्ढा बेहद गहरा था। अधिकारियों के अनुसार, बेसमेंट में जमा पानी की गहराई 60 से 70 फीट से भी अधिक थी, जिसमें भारी मात्रा में कीचड़ भरा हुआ था। इसी वजह से रेस्क्यू के दौरान अत्याधुनिक सोनार सिस्टम भी फेल हो गया था और कार को तलाशने व बाहर निकालने में छह घंटे से ज्यादा का समय लग गया। यह तथ्य भी प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण स्थल की खतरनाक स्थिति को उजागर करता है।
यह पूरा मामला अब नोएडा में अवैध और असुरक्षित निर्माण, निगरानी की कमी और आपातकालीन व्यवस्था की कमजोरियों का प्रतीक बन गया है। लोगों की मांग है कि केवल जांच रिपोर्ट तक मामला सीमित न रहे, बल्कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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