Noida ECHS Fraud Case: फर्जी कार्ड से इलाज कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

Noida ECHS Fraud Case: फर्जी कार्ड से इलाज कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार
Noida में ईसीएचएस (ECHS) कार्ड के जरिए फर्जी तरीके से इलाज कराने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। Bisrakh Police Station पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, व्हाट्सएप के जरिए इस्तेमाल किए गए फर्जी ईसीएचएस कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इस गिरोह ने फर्जी पहचान के जरिए निजी अस्पतालों में इलाज कराकर लाखों रुपये का अवैध लाभ उठाया।
Shakti Mohan Awasthi ने बताया कि गुप्त सूचना और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर कार्रवाई करते हुए शिखा सिंह, यश सिंह, जितेंद्र यादव और दानिश खान को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक व्यक्ति की बेटी के ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी इस्तेमाल कर अपनी बीमार बहन का इलाज कराया और करीब 6.50 लाख रुपये का फायदा उठाया।
हैरानी की बात यह है कि इलाज के दौरान महिला की मौत हो जाने के बाद आरोपियों ने उसी फर्जी नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार कर दिया और शव भी उसी नाम से प्राप्त किया। इस पूरे खेल के बदले मुख्य आरोपी दानिश खान को करीब 65 हजार रुपये ऑनलाइन और बाकी रकम नकद दी गई।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दानिश खान अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर पिछले दो साल से इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था। दोनों ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ होते थे और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराकर क्लेम दिलवाते थे। पुलिस के अनुसार, दोनों पहले भी इसी तरह के मामलों में जेल जा चुके हैं, लेकिन बाहर आने के बाद फिर से इस अवैध धंधे में सक्रिय हो गए।
इसी बीच, Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने भी उत्तर प्रदेश में ईसीएचएस से जुड़े भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सीबीआई ने एक मेडिकल ऑफिसर और निजी अस्पताल के असिस्टेंट जनरल मैनेजर को 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मेडिकल ऑफिसर कमीशन के बदले मरीजों को एक खास निजी अस्पताल में रेफर कर रहा था।
15 मार्च 2026 को दर्ज इस मामले में कुल पांच लोगों को नामजद किया गया है। सीबीआई ने नोएडा, एटा, फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए हैं। जांच एजेंसी अब इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मरीजों की मजबूरी और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।




