Noida Authority: नोएडा प्राधिकरण पर हंगामा: अनशनरत नागा साधुओं का ’51 कलश’ से स्नान, अफसरों से तीखी तकरार

Noida Authority: नोएडा प्राधिकरण पर हंगामा: अनशनरत नागा साधुओं का ’51 कलश’ से स्नान, अफसरों से तीखी तकरार
नोएडा। गौ माता को रहने की जगह और गौचर भूमि की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से नोएडा प्राधिकरण के सामने अनशन पर बैठे नागा साधु माधव गिरी ’गाय वाले बाबा’ और उनके समर्थकों ने आज एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मंत्रोचारण के साथ 51 कलश से स्नान किया और प्राधिकरण के अफसरों की सद्बुद्धि की कामना की। इस स्नान से पूर्व नागा साधुओं और गौ भक्तों ने प्राधिकरण की परिक्रमा की, और इस दौरान जोरदार प्राधिकरण विरोधी नारे भी लगाए।
प्राधिकरण अधिकारियों से तकरार
धरना स्थल पर पहुंचे नोएडा प्राधिकरण के डीजीएम विजय रावल ने अपनी टीम के साथ धरना स्थल से खाली करने की मांग की। इस पर नागा साधुओं और गौ भक्तों ने उनका विरोध किया और डीजीएम विजय रावल से तीखी बहस भी की। रावल ने आरोप लगाया कि अनशन स्थल और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर साधुओं ने कब्जा कर लिया है, जबकि माधव गिरी महाराज ने इन आरोपों को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी जमीन पर कब्जा करना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ गौ-सेवा और गौचर भूमि की मांग कर रहे हैं।
माधव गिरी ने यह भी कहा कि प्राधिकरण ने उनके लिए कोई सुविधाएं नहीं दी हैं, और अगर उन्हें यहां से जबरन हटाया गया, तो वे आत्मदाह करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने गौ-चर भूमि को बिल्डरों को बेच दिया है और वहां 5 प्रतिशत प्लॉट काट दिए गए हैं।
गौ-सेवा की मांग और विवाद
इस दौरान माधव गिरी ’गाय वाले बाबा’ ने आरोप लगाया कि गौचर भूमि का प्राधिकरण द्वारा बिल्डरों को हस्तांतरण गौ माता के खिलाफ है, और यह सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ जाता है। डीजीएम विजय रावल ने अपनी सनातन धर्म में आस्था का दावा किया, लेकिन माधव गिरी भड़क गए और पूछा, “फिर गायों की हत्याएं क्यों हो रही हैं? सड़कों पर गाय घायल हो रही हैं, यह कैसा सनातन धर्म है?”
सार्वजनिक समर्थन और चेतावनी
नागा साधुओं ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि अगर उन्हें जबरन यहां से हटाया गया, तो वे आत्मदाह करने को बाध्य होंगे। उनका यह विरोध गौ-सेवा और गौ-माता के लिए उपयुक्त स्थान की मांग से जुड़ा हुआ है।
समाज में गहरी चर्चा
यह घटना नोएडा प्राधिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है, जहां प्रशासन की ओर से भूमि के उपयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं और साधुओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल गौ-सेवा है। वहीं, गौ-भक्तों और साधुओं की यह चेतावनी इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना सकती है।
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