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Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कार्गो उड़ानों की शुरुआत, चेन्नई से पहुंचा पहला मालवाहक विमान

Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कार्गो उड़ानों की शुरुआत, चेन्नई से पहुंचा पहला मालवाहक विमान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए कार्गो उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया। देश के पहले इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित हो रहे इस एयरपोर्ट पर पहली घरेलू मालवाहक उड़ान के आगमन के साथ ही लॉजिस्टिक्स और कार्गो परिवहन के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। बुधवार सुबह करीब 7:20 बजे एफकॉम एयरलाइंस का चार्टर्ड मालवाहक विमान चेन्नई से 20 टन कार्गो लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। पहली फ्रेटर फ्लाइट के आगमन पर विमान को पारंपरिक वाटर कैनन सेल्यूट देकर सम्मानित किया गया। एयरपोर्ट अधिकारियों, अतिथियों और कर्मचारियों ने तालियां बजाकर इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया। पहली कार्गो उड़ान में जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं, कंसोलिडेशन शिपमेंट, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और मोबाइल डिवाइस सहित विभिन्न प्रकार का माल लाया गया। इस अवसर पर एयरपोर्ट पर विकसित इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम की भी सफलतापूर्वक जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार कार्गो हैंडलिंग, सुरक्षा, लोडिंग-अनलोडिंग और अन्य सभी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप सफल रहीं। दोपहर लगभग 12:15 बजे यही विमान 16 टन कार्गो लेकर वापस चेन्नई के लिए रवाना हुआ। वापसी की उड़ान में पठानकोट से लाई गई लीची, दिल्ली क्षेत्र का इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य व्यावसायिक माल भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि अब मांग और आवश्यकता के अनुसार नियमित रूप से कार्गो उड़ानों का संचालन किया जाएगा। कार्गो टर्मिनल के औपचारिक शुभारंभ के दौरान एयरपोर्ट प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर फीता काटकर संचालन का उद्घाटन किया गया और इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए केक भी काटा गया। उपस्थित अधिकारियों ने इसे नोएडा और पूरे उत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कार्गो सेवाएं शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों के उद्योगों, निर्यातकों और व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

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