Cyber Alert: नोएडा जल विभाग के नाम पर फर्जी कॉल और व्हाट्सऐप नोटिस से सावधान, प्राधिकरण ने जारी की चेतावनी

Cyber Alert: नोएडा जल विभाग के नाम पर फर्जी कॉल और व्हाट्सऐप नोटिस से सावधान, प्राधिकरण ने जारी की चेतावनी
नोएडा में साइबर ठग अब सरकारी विभागों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग के नाम पर फर्जी संदेश और नोटिस भेजकर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। प्राधिकरण ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार साइबर ठग खुद को “नोएडा वाटर सप्लाई डिस्ट्रीब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड” अथवा “नोएडा जल” का प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सऐप पर संदेश भेज रहे हैं। इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि उपभोक्ता का पिछले महीने का पानी का बिल जमा नहीं हुआ है और यदि तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो रात 9:30 बजे जलापूर्ति काट दी जाएगी।
प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक, जल खंड-प्रथम के अनुसार ठग लोगों को बिल अपडेट कराने के बहाने कुछ मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने के लिए कह रहे हैं। इनमें 9070249504, 7479784814 और 9939042972 नंबर शामिल हैं। ठग इन नंबरों के साथ विभिन्न अधिकारियों के नाम का भी उपयोग कर रहे हैं ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके।
साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल फोन पर “Pipeline Water Bill Update.apk” नाम की फाइल भी भेज रहे हैं। इस फाइल पर “नोएडा जल” की प्रोफाइल फोटो लगाई गई है ताकि यह आधिकारिक प्रतीत हो। विशेषज्ञों के अनुसार APK फाइल डाउनलोड करने से मोबाइल फोन हैक हो सकता है और बैंकिंग, यूपीआई तथा अन्य निजी जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है।
नोएडा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जल विभाग की ओर से इस प्रकार का कोई नोटिस, व्हाट्सऐप संदेश, लिंक या APK फाइल जारी नहीं की गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि यह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक गतिविधि है, जिसका उद्देश्य लोगों को धोखा देकर उनकी निजी और वित्तीय जानकारी हासिल करना है।
प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आए ऐसे संदेशों पर विश्वास न करें। किसी लिंक पर क्लिक न करें, कोई APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें और न ही किसी अज्ञात व्यक्ति को बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा करें। मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण ने साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी नागरिक को इस प्रकार का संदेश प्राप्त होता है तो वह तुरंत उसे नजरअंदाज करे और किसी भी प्रकार की जानकारी साझा न करे। संदेह होने पर सीधे संबंधित विभाग के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर या कार्यालय से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें।





