
New Delhi : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के विजयपुरम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) डी के जोशी उपस्थित थे।

अमित शाह ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आज सभी भारतवासियों के लिए एक तीर्थस्थान बन गया है क्योंकि यहां वीर सावरकर ने अपने जीवन के सबसे कठिन समय को बिताया है। उन्होंने कहा कि यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष बाबू की स्मृति से भी जुड़ा है।
शाह ने कहा कि वीर सावरकर की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उनकी विचारधारा को सही मायने में आगे बढ़ाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा कई साल तक वीर सावरकर के बलिदान, संकल्प और भारत माता के प्रति अखंड समर्पण का प्रतीक बनकर रहेगी।
अमित शाह ने कहा कि वीर सावरकर की कविता ‘सागरा प्राण तळमळला’ देशभक्ति की अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि सावरकर जी का जीवन हिंदुत्व के प्रति एक दृढ़ श्रद्धा रखने वाला था, जो आधुनिक भी था और परंपराओं को साथ लेकर उनका वहन करने वाला भी था।
शाह ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का चिंतन, जिसके आधार पर आज प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सरकार चल रही है, वीर सावरकर जी ने ही इसकी नींव और व्याख्या करने का काम किया था। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर जी को वीर की उपमा किसी सरकार ने नहीं दी है, बल्कि देश के जन जन ने दी है।
अमित शाह ने कहा कि आज देश के लिए बलिदान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन देश के लिए जीने की ज़रूरत आज भी है और तभी सावरकर जी की कल्पना का भारत हम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे युवा अगर सावरकर जी की कल्पना का भारत बनाना चाहते हैं तो अपने काम के क्षेत्र में सावरकर जी की प्रेरणा के अनुरूप जीवन जीकर उसका लक्ष्य सुरक्षित और सबसे समृद्ध भारत की रचना का होना चाहिए।





