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नई दिल्ली: हाई ब्लड प्रेशर -ओबेसिटी के शिकार बन रहे स्कूली बच्चे 

नई दिल्ली: -निजी स्कूलों के बच्चों में सरकारी स्कूलों के बच्चों से 5 गुना ज्यादा मोटापा

नई दिल्ली, 30 मई: विभिन्न रोगों का कारण बनने वाला मोटापा अब देश के वयस्कों के साथ बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है। इसकी तस्दीक एम्स दिल्ली का शोध पत्र कर रहा है जिसके मुताबिक राजधानी दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले 13.4% छात्र ना सिर्फ सामान्य से ज्यादा वजनी (मोटे) हैं। बल्कि उच्च रक्तचाप के भी शिकार हैं। यही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में मोटापे की व्यापकता 24.02% तक हो गई है, जो सरकारी स्कूलों के मुकाबले पांच गुना अधिक है।

यह शोध पत्र एक अलार्म बनकर उभरा है जिसकी आवाज ने राजधानी दिल्ली सहित देशभर के अभिभावकों को सतर्क कर दिया है। दरअसल, एम्स दिल्ली के एंडोक्रिनोलॉजी के प्रमुख डॉ. निखिल टंडन और बायोस्टैटिस्टिक्स विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. एम. कलैवानी ने दिल्ली के 6-19 वर्ष आयु के 3,888 स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के आधार पर अपना शोध पत्र तैयार किया है। उन्होंने निजी व सरकारी स्कूलों के बच्चों के बीएमआई, शुगर और रक्तचाप के डेटा का विश्लेषण करने के बाद पाया कि औसतन 13.4% छात्र सामान्य रूप से मोटे और 9.2 % पेट की चर्बी वाले मोटापे के शिकार थे।

इस शोध में पाया गया है कि निजी स्कूलों में मोटापे की समस्या बहुत ज्यादा थी। वहां 24.02 % सामान्य मोटापा और 16.77% पेट की चर्बी वाला मोटापा दर्ज किया गया, जबकि सरकारी स्कूलों में सामान्य मोटापा 4.48% और पेट की चर्बी वाला मोटापा 1.83% दर्ज किया गया। हालांकि, निजी और सरकारी दोनों स्कूलों के छात्रों में उच्च रक्तचाप की समस्या तो एक समान यानि 7.4 % दर्ज की गई लेकिन निजी स्कूलों के छात्रों में ब्लड शुगर होने की संभावना सरकारी स्कूलों के छात्रों से दोगुनी और मेटाबोलिक सिंड्रोम होने की संभावना तीन गुनी ज्यादा पाई गई।

मुख्य शोधार्थी डॉ. एम कलैवानी ने बताया कि मेटाबोलिक सिंड्रोम की पहचान पांच आधारों पर की जाती है। इनमें रक्तचाप, कमर की परिधि, खाली पेट रक्त ग्लूकोज, एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स शामिल हैं। अगर इनमें से कोई भी तीन असामान्य हैं, तो बच्चे को मेटाबोलिक सिंड्रोम माना जाता है। उन्होंने कहा, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से कई का वजन सामान्य था, लेकिन फिर भी उनमें मेटाबोलिक सिंड्रोम पाया गया। भविष्य में, इन बच्चों को रक्तचाप, कमर के आकार, रक्त शर्करा के स्तर और कोलेस्ट्रॉल से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

डॉ. कलैवानी के मुताबिक शोध में लगभग 34% छात्रों में डिस्लिपिडेमिया पाया गया। जो कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एचडीएल), या कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) के असामान्य स्तर को संदर्भित करता है। डॉ. निखिल टंडन ने कहा, बच्चों का वर्तमान मोटापा अभी डायबिटीज का कारण नहीं बन रहा है, लेकिन इसकी संभावना बढ़ रही है। मोटापा गैर-संचारी रोगों में वृद्धि का भी प्रमुख कारण है। इस बारे में अभिभावकों को बच्चे के खान-पान, संतुलित आहार और जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। अच्छे स्वास्थ्य के लिए पोषण जितना जरुरी है, अति-पोषण उतना ही नुकसान दायक है।

बच्चों में क्यों बढ़ रही मोटापे की समस्या
स्कूली बच्चों में मोटापा बढ़ने के पीछे बच्चे द्वारा ब्रांडेड प्रोसेस्ड स्नैक्स के सस्ते और छोटे पैकेट खरीद कर खाना और स्ट्रीट वेंडर से सस्ते दामों पर तला हुआ खाना या ज्यादा चीनी वाला खाना खरीद कर खाना भी बड़ी वजह है। इससे बच्चे खाने -पीने की चीजों से जितनी ऊर्जा ग्रहण कर रहे हैं उतनी ऊर्जा खर्च नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, बच्चे एक जगह बैठकर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के आदी हो गए हैं। नतीजतन ज्यादा मात्रा में खाई गई कैलोरी खर्च न होने से वो चर्बी में बदल रही है और अंगों के आस-पास जमा हो रही है।

कैसे नियंत्रित करें बच्चों का मोटापा ?
वर्ष 2006 के शोध में सरकारी स्कूलों में कम वजन वाले बच्चों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन अब वे भी मोटापे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने मध्याह्न भोजन योजना में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया ताकि बच्चों को बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट के बजाय दोपहर के भोजन में प्रोटीन और फाइबर वाले भोजन दिए जा सकें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की, वे बच्चों की दैनिक शारीरिक गतिविधि का समय बढ़ाएं, सेलफोन के उपयोग में कमी लाएं और बच्चों को संतुलित आहार के बारे में शिक्षित करें।

क्या है मोटापा ?
यह बहुत ज्यादा बॉडी फैट की वजह से होने वाली समस्या है जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ जाता है। सामान्य दैनिक गतिविधियों और कसरत आदि में खर्च होने वाली कैलोरी से ज्यादा कैलोरी लेना, मोटापा बढ़ने की सबसे आम वजह होती है। मोटापा तब होता है जब किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या इससे अधिक होता है। मोटापे के कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, कुछ प्रकार के कैंसर, जोड़ों का दर्द, और नींद की समस्याएं शामिल हैं।

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