LGBTQIA+: 17 साल के छात्र ईशान बजाज ने खड़ा किया वैश्विक समावेशी नेटवर्क, 25 देशों तक पहुंचा ‘स्वयं’

LGBTQIA+: 17 साल के छात्र ईशान बजाज ने खड़ा किया वैश्विक समावेशी नेटवर्क, 25 देशों तक पहुंचा ‘स्वयं’
जयपुर के 17 वर्षीय छात्र ईशान बजाज ने कम उम्र में एक ऐसा सामाजिक अभियान शुरू किया है, जिसने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। वर्ष 2025 में एक स्कूल प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ उनका संगठन ‘स्वयं’ आज 25 देशों में सक्रिय युवा-संचालित LGBTQIA+ समावेशी नेटवर्क बनने का दावा करता है। संगठन का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि LGBTQIA+ समुदाय के युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से जोड़ना भी है। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले युवाओं तक पहुंच बनाना इस अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
ईशान बजाज का कहना है कि समाज के कई हिस्सों में आज भी LGBTQIA+ समुदाय के लोगों को भेदभाव, मानसिक दबाव और रोजगार के सीमित अवसरों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ‘स्वयं’ की शुरुआत की गई थी, ताकि युवाओं को सुरक्षित माहौल, परामर्श, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। संगठन का दावा है कि उसने अपने विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से हजारों युवाओं तक सीधी पहुंच बनाई है।
संगठन के अनुसार, कानपुर, लखनऊ, जयपुर, देहरादून, चंडीगढ़ और फिलीपींस सहित कई शहरों में आयोजित प्राइड कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सामुदायिक आयोजनों में करीब 40 हजार लोगों ने भाग लिया। वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए चार लाख से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच बनी है। संगठन यह भी दावा करता है कि उसके री-स्किलिंग और रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 200 लोगों को नौकरी दिलाने में मदद की गई है।
‘स्वयं’ अब भारत के अलावा पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, इटली, मंगोलिया और फिलीपींस जैसे देशों तक अपनी गतिविधियों का विस्तार कर चुका है। संगठन विभिन्न देशों के युवाओं को जोड़कर समावेशी समाज बनाने की दिशा में काम कर रहा है और भविष्य में अपने नेटवर्क को और व्यापक बनाने की योजना पर कार्य कर रहा है।
ईशान बजाज ने बताया कि आगामी ‘हमारी आवाज’ अभियान के तहत 8 अगस्त को देश के 25 राज्यों के 25 शहरों में छात्रों को ट्रांसजेंडर अधिकारों और समान अवसरों के समर्थन में जोड़ने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि युवाओं की भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और समानता, सम्मान तथा संवेदनशीलता की भावना को मजबूत किया जा सकता है।





