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Noida Health: 47 वर्षीय मरीज का कॉम्प्लेक्स किडनी ट्रांसप्लांट सफल, सड़क हादसे में पैर गंवाने के बाद भी नई जिंदगी मिली

Noida Health: 47 वर्षीय मरीज का कॉम्प्लेक्स किडनी ट्रांसप्लांट सफल, सड़क हादसे में पैर गंवाने के बाद भी नई जिंदगी मिली

नोएडा। Medanta Hospital में डॉक्टरों की टीम ने एक 47 वर्षीय मरीज सुमित त्यागी का बेहद जटिल किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर नई मिसाल पेश की है। यह सर्जरी इसलिए भी खास रही क्योंकि मरीज पहले ही एक सड़क दुर्घटना में अपना दायां पैर खो चुके थे, जिससे ऑपरेशन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया था।

डॉक्टरों के अनुसार, सुमित त्यागी पिछले कई वर्षों से क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती गई और अंततः किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा। इस कठिन समय में उनकी 62 वर्षीय मां ने आगे आकर अपनी किडनी दान करने का फैसला किया, जिसने इस जटिल सर्जरी को संभव बनाया।

इस सर्जरी को Dr. Dushyant Nadar और Dr. Manoj Kumar Singhal की विशेषज्ञ टीम ने अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बताया कि सामान्य तौर पर डोनर किडनी को शरीर के दाहिने हिस्से में प्रत्यारोपित कर दाएं पैर की ब्लड वेसल्स से जोड़ा जाता है, लेकिन इस केस में मरीज का दायां पैर पहले ही कट चुका था। ऐसे में सर्जरी को बाईं ओर करना पड़ा और किडनी को बाएं पैर की ब्लड वेसल्स से जोड़ा गया।

चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं। डोनर किडनी में डबल रीनल आर्टरी और डबल यूरेटर्स होने के कारण ऑपरेशन और भी जटिल हो गया। सर्जिकल टीम ने अत्यंत सटीकता के साथ आर्टरीज को जोड़ा और ब्लड फ्लो सुनिश्चित किया, साथ ही दोनों यूरेटर्स को यूरिनरी ब्लैडर से सफलतापूर्वक कनेक्ट किया।

सर्जरी के बाद सुमित की रिकवरी तेज रही और अब वे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह केस आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां जटिल और हाई-रिस्क परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की गई।

यह सफल ट्रांसप्लांट न केवल मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आया है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सही इलाज और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।

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