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Eye Donation India: अब देश में नेत्रदान की प्रक्रिया और आसान, कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन नियमों में बड़ा बदलाव

Eye Donation India: अब देश में नेत्रदान की प्रक्रिया और आसान, कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन नियमों में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली,  केंद्र सरकार ने देश में नेत्रदान और कॉर्नियल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को और सरल बना दिया है। इस बदलाव के साथ अब कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन केंद्रों में क्लिनिकल स्पेक्युलर उपकरण का होना अनिवार्य नहीं रहेगा। यह निर्णय नेत्रदान को प्रोत्साहित करने, कॉर्निया दान की संख्या बढ़ाने और देश में कॉर्नियल अंधापन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अंग और ऊतक प्रत्यारोपण सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 6 नवंबर 2025 को मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) नियम, 2025 को अधिसूचित किया है। ये संशोधन मानव अंग और टिशू प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के अंतर्गत किए गए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, पहले कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन केंद्रों में क्लिनिकल स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप का होना अनिवार्य था। इस उपकरण का उपयोग एंडोथेलियल कोशिकाओं के आकार, आकृति और संख्या का आकलन करने के लिए किया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों और हितधारकों के व्यापक परामर्श के बाद सरकार ने इसे अब वैकल्पिक बना दिया है। इस कदम से छोटे अस्पतालों और नेत्र बैंकों को भी कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिससे पूरे देश में नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा बढ़ेगी।

सरकार का मानना है कि इस नियम संशोधन से नेत्रदान की प्रक्रिया को आसान बनाकर अधिक लोग इसमें भाग लेंगे। देश में अभी भी नेत्रदान की दर अमेरिका और श्रीलंका जैसे देशों की तुलना में काफी कम है। जबकि भारत में लाखों लोग कॉर्नियल अंधेपन से पीड़ित हैं और हर वर्ष किए जाने वाले ट्रांसप्लांट की संख्या जरूरत से बहुत कम है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, नियमों के सरलीकरण से दान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और जरूरतमंद मरीजों के लिए अधिक कॉर्निया उपलब्ध कराना संभव होगा। साथ ही, भारत में एक नई नीति भी लागू की जा रही है जिसके तहत जिन अस्पतालों में मरीजों की मृत्यु होती है, वहां कॉर्निया को स्वचालित रूप से दान के लिए माना जाएगा जब तक कि व्यक्ति या उसके परिजन इसे अस्वीकार न करें। यह कदम भारत में नेत्रदान की संस्कृति को बढ़ावा देने और कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन संशोधनों से न केवल कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन प्रक्रिया अधिक सुलभ होगी बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी मरीजों को समय पर नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा मिलेगी। इससे देश में “दृष्टि के अधिकार” को साकार करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति होगी।

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