
INS Anjadeep Inducted: पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अंजदीप नौसेना में शामिल, आत्मनिर्भर भारत की समुद्री ताकत को मिली नई धार
नई दिल्ली/चेन्नई, 27 फरवरी। भारतीय नौसेना की ताकत में एक और महत्वपूर्ण इजाफा करते हुए पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘आईएनएस अंजदीप’ को चेन्नई में आयोजित भव्य समारोह के दौरान नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। यह आधुनिक युद्धपोत गहरे और उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमता से लैस है। इसके शामिल होने से भारत की तटीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा और सामरिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर दिनेश के त्रिपाठी, प्रमुख भारतीय नौसेना ने कहा कि आईएनएस अंजदीप चौथा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है। इसे विशेष रूप से समुद्र के उथले क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रमाण है।
युद्धपोत में हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और अत्याधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इन प्रणालियों की मदद से यह तटीय इलाकों में छिपी पनडुब्बियों की सटीक पहचान कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि अंजदीप केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की समुद्री विरासत, रणनीतिक दूरदर्शिता और भविष्य की समुद्री शक्ति का प्रतीक है।
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि अक्टूबर 2023 से नौसेना की सक्रिय तैनाती ने रेड सी क्षेत्र में लगभग 400 व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है, जिनमें भारत के लिए 16.5 मिलियन टन से अधिक कार्गो शामिल था। यह भारत की समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में नौसेना ने 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया है, जबकि 2026 में लगभग 15 और जहाजों को बेड़े में शामिल करने की योजना है। नौसेना का लक्ष्य 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली सशक्त और आधुनिक नौसेना तैयार करना है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की समुद्री परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है और आज भी देश की सुरक्षा एवं आर्थिक समृद्धि समुद्र से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी को ‘समुद्री सदी’ कहा जा रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक समुद्री गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। इस क्षेत्र से हर वर्ष लगभग 1.2 लाख जहाज गुजरते हैं, जो विश्व के दो-तिहाई तेल, एक-तिहाई बल्क कार्गो और आधे कंटेनर यातायात का परिवहन करते हैं।
मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। लाल सागर संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समुद्री मार्गों में हल्का सा व्यवधान भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे समय में आईएनएस अंजदीप जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भारत के समुद्री व्यापार मार्गों और तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
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