Indian Pharmacopoeia: ब्राजील में गूंजी भारत की दवा गुणवत्ता की धाक, वैश्विक मंच पर मिली बड़ी पहचान

Indian Pharmacopoeia: ब्राजील में गूंजी भारत की दवा गुणवत्ता की धाक, वैश्विक मंच पर मिली बड़ी पहचान
नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 16वीं इंटरनेशनल मीटिंग ऑफ वर्ल्ड फार्माकोपियाज में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वैज्ञानिक और नियामकीय क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि ने वैश्विक दवा गुणवत्ता मानकों के निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका को और मजबूती प्रदान की है। ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया की प्रमुख फार्माकोपियाओं और दवा नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान भारतीय फार्माकोपिया के गुणवत्ता मानकों को विश्व की अग्रणी फार्माकोपियाओं के समकक्ष माना गया। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इससे दवा गुणवत्ता और सुरक्षा के क्षेत्र में देश की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और मजबूत हुई है। बैठक में विशेष रूप से तपेदिक (टीबी), कैंसर, एनीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं के गुणवत्ता मानकों के विकास में भारत की भूमिका की सराहना की गई। इसके अलावा रक्त एवं रक्त उत्पादों तथा जटिल औषधियों के लिए उच्च गुणवत्ता मानक तैयार करने में भारतीय विशेषज्ञता को भी वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय फार्माकोपिया आयोग के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलाइसेल्वन ने किया। उन्होंने बैठक के दौरान भारतीय फार्माकोपिया में किए गए आधुनिक सुधारों, गुणवत्ता मानकों के अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य और दवाओं की सुरक्षा, प्रभावशीलता तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. कलाइसेल्वन ने बताया कि भारत लगातार अपने दवा गुणवत्ता मानकों को वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित कर रहा है। उन्होंने भारतीय फार्माकोपिया में शामिल नई वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक परीक्षण प्रक्रियाओं और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य दुनिया भर के मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक के दौरान भारत ने आधुनिक माइक्रोबायोलॉजिकल तकनीकों, पर्यावरणीय स्थिरता, हरित वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और वैश्विक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सक्रिय योगदान दिया। भारतीय विशेषज्ञों ने यह बताया कि दवा निर्माण और परीक्षण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किस प्रकार गुणवत्ता और सुरक्षा को बेहतर बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक फार्मास्यूटिकल उद्योग में भारत की मजबूत स्थिति और गुणवत्ता मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता ने देश को विश्व स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बना दिया है। भारत न केवल दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है, बल्कि दवा गुणवत्ता और नियामक मानकों के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में मिली सराहना से यह स्पष्ट हुआ है कि भारतीय फार्माकोपिया अब केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दवा गुणवत्ता मानकों को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, शोध कौशल और स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक नेतृत्व का प्रमाण मानी जा रही है।





