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Monsoon Health: मानसून में गंदा पानी बन सकता है बीमारी की बड़ी वजह, पेट की तकलीफों से बचने के लिए बरतें सावधानी

Monsoon Health: मानसून में गंदा पानी बन सकता है बीमारी की बड़ी वजह, पेट की तकलीफों से बचने के लिए बरतें सावधानी

नई दिल्ली, 30 जुलाई: बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मानसून के दौरान फूड पॉइजनिंग, डायरिया, हैजा, टाइफाइड, वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस और पेचिश जैसी बीमारियां अधिक देखने को मिलती हैं। इन संक्रमणों के कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में समय रहते पर्याप्त तरल पदार्थ और ओआरएस का सेवन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

लोकनायक अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. नरेश कुमार के अनुसार मानसून में होने वाले अधिकांश पेट के संक्रमण दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन से जुड़े होते हैं। यदि दस्त या उल्टी 24 घंटे से अधिक समय तक बनी रहे, तेज बुखार आए, मल में खून दिखाई दे या डिहाइड्रेशन के लक्षण नजर आएं तो खुद से एंटीबायोटिक लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर के मुताबिक शुरुआती स्तर पर पर्याप्त तरल पदार्थ, ओआरएस और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय उपचार सबसे प्रभावी उपाय हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

मानसून में पेट की बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ता है

बारिश के दौरान पानी के दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा नमी के कारण भोजन में बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। खुले में रखा भोजन, अधपका खाना और साफ-सफाई की कमी भी संक्रमण का कारण बन सकती है।

दूषित या बिना उबाला पानी पीना, खुला या बासी भोजन खाना, भोजन से पहले हाथ साफ न करना, मक्खियों के संपर्क में आया खाना, बारिश के कारण दूषित हुए जल स्रोतों का इस्तेमाल और लंबे समय से फ्रिज में रखे या बार-बार गर्म किए गए भोजन का सेवन पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

बार-बार पतले दस्त, उल्टी या मतली, तेज पेट दर्द या मरोड़, बुखार, अत्यधिक प्यास, मुंह सूखना, पेशाब कम आना, कमजोरी, चक्कर और अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

यदि मरीज को तेज डिहाइड्रेशन, लगातार उल्टी, मल में खून या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में शरीर में पानी की कमी तेजी से गंभीर हो सकती है।

बीमारियों से बचने के लिए क्या करें

मानसून में केवल उबला, फिल्टर किया हुआ या सुरक्षित पैक्ड पानी ही पीना चाहिए। खाना खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है। ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाना चाहिए।

कटे हुए फल, खुले पेय पदार्थ और सड़क किनारे खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है। घर में पानी की टंकियों और बर्तनों की नियमित सफाई भी जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उनमें डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है।

ओआरएस क्यों है जरूरी

डायरिया और उल्टी के दौरान शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और अन्य जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकलते हैं। ओआरएस शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है। दस्त या उल्टी होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस दिया जा सकता है। इसे छोटे-छोटे घूंट में बार-बार देना कई मामलों में अधिक आसानी से सहन किया जाता है।

 

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