Himachal Fish MSP Policy: जलाशय मछलियों पर MSP लागू, रॉयल्टी घटाकर 1% से मछुआरों को बड़ी राहत

Himachal Fish MSP Policy: जलाशय मछलियों पर MSP लागू, रॉयल्टी घटाकर 1% से मछुआरों को बड़ी राहत
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मछुआरा समुदाय के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जलाशयों से मिलने वाली मछलियों पर पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के बजट 2026-27 के तहत इस पहल को लागू किया जा रहा है, जिससे मछुआरों की आय को स्थिर और सुरक्षित बनाने का लक्ष्य है।
सरकार ने जलाशय मछलियों के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम का MSP तय किया है। यदि नीलामी में कीमत इससे कम रहती है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी सीधे मछुआरों के खातों में देगी। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव से मछुआरों को राहत मिलेगी और उन्हें उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।
इसके साथ ही सरकार ने मछुआरों को बड़ी राहत देते हुए रॉयल्टी दर को घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह 15 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया था और अब इसे और कम कर दिया गया है। इस फैसले से 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका आर्थिक बोझ काफी कम होगा।
राज्य के प्रमुख जलाशयों—गोबिंद सागर, पोंग डैम, रंजीत सागर, चमेरा और कोल डैम—में मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। उन्नत फिंगरलिंग्स के स्टॉकिंग जैसे प्रयासों के चलते उत्पादन वर्ष 2022-23 के 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।
सरकार की इन नीतियों का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करना, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा देना और मछुआरों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। साथ ही, मत्स्य अवसंरचना, विपणन व्यवस्था और ग्रामीण रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश में कुल मछली उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2024-25 के 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह बढ़ोतरी राज्य सरकार की योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है।





