Himachal: मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलकर हिमाचल के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग उठाई

Himachal: मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलकर हिमाचल के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग उठाई
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट कर हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग का अनुरोध किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों, सीमित संसाधनों और बढ़ते दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र से विशेष सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन और अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी। उन्होंने आग्रह किया कि राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किया जाए, ताकि राज्य की बुनियादी आवश्यकताओं और विकास योजनाओं को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व और व्यय अनुमानों का यथार्थवादी आकलन किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से ‘ग्रीन फंड’ के गठन की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि इसमें प्रतिवर्ष कम से कम 50 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य देश की ग्रीन फ्रंटियर्स हैं और इनके वन, जल स्रोत और पारिस्थितिकी पूरे देश के लिए जीवन रेखा का काम करते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास के लिए विशेष वित्तीय व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने होरिजेंटल डिवेल्यूशन के लिए राज्य द्वारा प्रस्तावित संशोधित फार्मूले की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें वन और वनों पर आधारित पारिस्थितिकी को प्रमुख मानदंड बनाया जाना चाहिए। साथ ही हिमाच्छादित और शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी अधिक सघन और मध्यम सघन वनों के साथ शामिल करने की मांग की, क्योंकि ये क्षेत्र सह-अस्तित्व और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य मैदानी इलाकों से नहीं की जा सकती, क्योंकि यहां भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कहीं अधिक है। बार-बार आने वाली आपदाओं के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने विशिष्ट संकेतकों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग आपदा जोखिम सूचकांक और पृथक वित्तीय आवंटन की मांग की।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य को अतिरिक्त सहयोग प्रदान करने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्व घाटा अनुदान में आई भारी कमी से हिमाचल की वित्तीय क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य को जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत तक उधार लेने की अनुमति देने की मांग भी रखी, ताकि विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को गति दी जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।





